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सीहोर | 16 मार्च, 2026 शहर के महिला घाट स्थित गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर में जायसवाल परिवार और सनातन प्रेमी भक्तजनों द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। ब्रह्मलीन श्री त्यागी महाराज के शिष्य महंत उद्धव दास महाराज अपनी अमृतमयी वाणी से भक्तों को भक्ति मार्ग का दर्शन करा रहे हैं।

गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग का भव्य आयोजन
सोमवार को कथा के दौरान गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव का विशेष आयोजन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किए गए और पूरा पंडाल “गिरिराज धरण की जय” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
इंद्र का अहंकार और प्रकृति प्रेम का संदेश
महंत उद्धव दास महाराज ने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि:
- प्रकृति की पूजा: भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के बजाय प्रकृति (गोवर्धन पर्वत) और गौ-सेवा की पूजा के लिए प्रेरित किया।
- इंद्र का मान-मर्दन: जब क्रोधित इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की, तब कन्हैया ने अपनी छोटी उंगली पर सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की।
- लीलाओं का वर्णन: कथा के दौरान अघासुर वध, माखन चोरी और कालिया नाग मर्दन के प्रसंगों के माध्यम से भक्तों को अहंकार त्यागने का संदेश दिया गया।

भक्ति और कर्मयोग का महत्व
महाराज जी ने कहा कि ईश्वर वैभव से नहीं, बल्कि सच्ची निष्ठा से प्रसन्न होते हैं। उन्होंने रामायण की चौपाई “होइहि सोइ जो राम रचि राखा” का उदाहरण देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्य पूरी ईमानदारी से करने चाहिए और फल की चिंता प्रभु पर छोड़ देनी चाहिए।
“परमात्मा के द्वार पर कभी खाली हाथ न जाएं। यदि कुछ न हो, तो विनम्र भाव से शीश झुकाना भी सबसे बड़ी भेंट है।” – महंत उद्धव दास महाराज
आज का विशेष आकर्षण: रुक्मणी विवाह
कथा समिति ने बताया कि आज (मंगलवार) भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनाया जाएगा। इस दौरान भव्य विवाह महोत्सव का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।




