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सीहोर। शहर के महिला घाट स्थित गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर (नदी चौराहा) में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। जायसवाल परिवार द्वारा आयोजित इस कथा में मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का मंगल परिणय बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ।
✨ “अविद्या” का नाश और “मन का कपट” हरते हैं श्रीकृष्ण
ब्रह्मलीन श्री त्यागी महाराज के शिष्य महंत उद्धव दास महाराज ने कथा के दौरान भगवान की बाल लीलाओं का मर्म समझाया। उन्होंने कहा:
- पूतना वध का संदेश: भगवान ने जन्म के छठे दिन ही ‘अविद्या’ रूपी पूतना का वध किया। जहाँ श्रीकृष्ण का चिंतन होता है, वहाँ अविद्या (अज्ञान) टिक नहीं सकती।
- माखन चोरी का भाव: भगवान माखन नहीं, बल्कि गोपियों के मन का कपट चुराते थे। जब तक मन के विकार दूर नहीं होते, तब तक प्रभु की प्राप्ति संभव नहीं है।

💍 भव्य झांकी और पाणिग्रहण संस्कार
रुक्मिणी विवाह के प्रसंग पर आकर्षक वेशभूषा में सजी श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की झांकी ने भक्तों का मन मोह लिया। विधि-विधान के साथ विवाह की रस्में पूरी की गईं और पूरा पांडल ‘नंद के आनंद भयो’ और ‘द्वारकाधीश की जय’ के जयकारों से गूँज उठा। भक्तों ने झूमते हुए पुष्प वर्षा कर मंगल उत्सव मनाया।
📅 आज होगा समापन: खेली जाएगी फूलों की होली
जायसवाल परिवार के औंकार प्रसाद जायसवाल एवं समिति ने बताया कि बुधवार को कथा का अंतिम दिवस है। समापन के अवसर पर भव्य “फूलों की होली” का आयोजन किया जाएगा। समिति ने सभी धर्मप्रेमी जनता से इस दिव्य अवसर पर पहुँचकर कथा श्रवण और होली उत्सव का आनंद लेने की अपील की है।




