सीहोर: ‘किसान वर्ष’ में अंधकार! सिंचाई के लिए तरस रहे खेत, 10 की जगह मिल रही सिर्फ 3 घंटे बिजली

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drnewsindia.com

सीहोर | एक तरफ सरकार ने इस वर्ष को ‘किसान वर्ष’ घोषित कर अन्नदाताओं की समृद्धि का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ सीहोर जिले के ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिले के दर्जनों गांवों में सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से फसलें सूखने की कगार पर हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

दावा 10 घंटे का, हकीकत सिर्फ 3-4 घंटे

नियमों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में पंप कनेक्शनों पर रोजाना 10 घंटे बिजली देने का प्रावधान है। लेकिन धरातल पर हकीकत इसके उलट है। किसानों का आरोप है कि उन्हें मुश्किल से 3 से 4 घंटे ही बिजली मिल रही है, वह भी आधी रात को।

  • रातभर जागने को मजबूर किसान: ग्राम बमुलिया के किसान ज्ञान सिंह परमार ने बताया, “हमें रात 2 बजे से सुबह 5 बजे तक सिर्फ 3 घंटे बिजली दी जा रही है। पूरी राशि जमा करने के बाद भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही, जिससे खेतों की सिंचाई असंभव हो गई है।”
  • रात का पहरा: किसान बहादुर सिंह का कहना है कि बिजली के इंतजार में उन्हें रातभर जागना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर खतरा बना रहता है।

इन गांवों में गहराया संकट

सीहोर जनपद के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में स्थिति विकट बनी हुई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

बमुलिया, भैंसाखेड़ी, बड़नगर, धबोटी, बिजलोन, आलमपुरा और बरखेड़ी।

इन क्षेत्रों में किसानों ने बड़े पैमाने पर प्याज, मूंग, सब्जियां और पशुओं के चारे की फसलें लगाई हैं। इन फसलों को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन बिजली की कमी के कारण उत्पादन गिरने की आशंका बढ़ गई है।


विभाग का तर्क: “आग लगने का खतरा”

इस समस्या पर बिजली विभाग का अपना तर्क है। बमुलिया सब स्टेशन के जेई चंद्रशेखर कुमार के अनुसार:

  • दोपहर के समय भीषण गर्मी और सूखे खेतों में शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा रहता है, इसलिए आपूर्ति बंद रखी जाती है।
  • पंचायतों की कथित सहमति से फिलहाल रात में 4 घंटे बिजली दी जा रही है।
  • विभाग का आश्वासन है कि फसल कटने के बाद व्यवस्था पुनः सामान्य कर दी जाएगी।

किसानों की मांग

परेशान किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली का शेड्यूल बदला जाए। उनकी मांग है कि नियमानुसार सुबह 5 घंटे और रात में 5 घंटे बिजली दी जाए, ताकि वे अपनी मेहनत की फसल को बचा सकें।

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