drnewsindia.com/नई दिल्ली | बुधवार, मार्च 25, 2026 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए वर्ष 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी है। यह कदम ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को जलवायु न्याय और सतत विकास के साथ जोड़ने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
लक्ष्य: पुराने रिकॉर्ड तोड़े, अब नई ऊंचाइयां
भारत ने अपने पिछले जलवायु लक्ष्यों को समय से पहले ही हासिल कर लिया है। इसी आत्मविश्वास के साथ 2035 के लिए नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं:
| क्षेत्र (Sector) | पिछला प्रदर्शन / वर्तमान स्थिति | नया लक्ष्य (2035 तक) |
| उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) | 2005-2020 के बीच 36% की कमी | 47% की कमी (2005 के स्तर से) |
| गैर-जीवाश्म ऊर्जा (Non-Fossil Power) | 52.57% क्षमता हासिल (फरवरी 2026) | 60% हिस्सेदारी का लक्ष्य |
| कार्बन सिंक (Carbon Sink) | 2.29 बिलियन टन (2021 तक) | 3.5 – 4.0 बिलियन टन CO2 समतुल्य |
हरित विकास के प्रमुख स्तंभ
भारत की इस नई रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने कई ‘गेम-चेंजर’ मिशनों को एकीकृत किया है:
- ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में वैश्विक हब बनने की तैयारी।
- पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के जरिए घरों को ‘ऊर्जा उत्पादक’ बनाना।
- ई-मोबिलिटी: परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करना।
- परमाणु ऊर्जा: बेस-लोड बिजली के लिए परमाणु क्षमता का विस्तार।
जलवायु अनुकूलन (Adaptation) पर विशेष जोर
केवल उत्सर्जन कम करना ही काफी नहीं, भारत बदलती जलवायु के प्रति खुद को तैयार भी कर रहा है:
- तटीय सुरक्षा: मैंग्रोव बहाली (मिष्टी योजना) और चक्रवात चेतावनी प्रणाली।
- हिमालयी संरक्षण: हिमनदों (Glaciers) की निगरानी और भूस्खलन जोखिम प्रबंधन।
- हीट एक्शन प्लान: शहरों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए विशेष कार्य योजना।
‘जन-भागीदारी’ से ‘जलवायु-परिवर्तन’ का मुकाबला
प्रधानमंत्री मोदी का विजन है कि जलवायु कार्रवाई एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बने।
- LiFE (Lifestyle for Environment): रोजमर्रा की जिंदगी में टिकाऊ बदलाव।
- एक पेड़ माँ के नाम: वृक्षारोपण को भावनात्मक और सामाजिक अभियान बनाना।
वैश्विक मंच पर भारत की धमक
भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (GBA) के माध्यम से दुनिया को राह दिखा रहा है। यह नया NDC पेरिस समझौते के लक्ष्यों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
“यह लक्ष्य केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और सुरक्षित भारत बनाने का हमारा वादा है।” — केंद्रीय मंत्रिमंडल




