drnewsindia.com
सीहोर | 26 मार्च, 2026 क्षेत्र में भीषण गर्मी और आगजनी का सिलसिला लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। निपानिया, बाबड़िया और कपूरी क्षेत्र में आग ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि सैकड़ों एकड़ खेत जलकर राख हो गए। जिला मुख्यालय से पहुंचीं तीन दमकल गाड़ियां भी घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने में असफल रहीं।
📍 घटना का केंद्र: सुबह 8 बजे से शुरू हुई तबाही
आग की शुरुआत गुरुवार सुबह मूडला निपानिया के तीन तालाबों के बीच से हुई। देखते ही देखते लपटों ने कपूरी, निपानिया कला और बाबड़िया के सैकड़ों खेतों को अपनी चपेट में ले लिया। आसमान में धुएं का काला गुबार देखकर आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान मौके पर पहुंचे।
🚜 किसानों का साहस: ट्रैक्टर और टहनियों से लड़ी जंग
जब दमकल की गाड़ियां कम पड़ने लगीं, तो किसानों ने खुद मोर्चा संभाला:
- पख्खर का उपयोग: आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किसानों ने ट्रैक्टरों में पख्खर (कृषि यंत्र) लगाकर नरवाई को हांकना शुरू किया।
- पारंपरिक तरीके: दर्जनों किसानों ने पेड़ों की टहनियों से आग पीट-पीटकर बुझाने का प्रयास किया।
- सामुदायिक प्रयास: कई गांवों के लोग एकजुट होकर घंटों तक आग से जूझते रहे।
💔 भारी नुकसान, पर टल गई बड़ी तबाही
आग ने किसानों की संपत्ति को भारी चोट पहुंचाई है:
- उपकरण खाक: खेतों में रखे सैकड़ों फीट पाइप और अन्य कीमती कृषि उपकरण जल गए।
- भूसा नष्ट: मवेशियों के लिए रखा भारी मात्रा में भूसा जलकर राख हो गया।
- गनीमत: कुछ दिन पहले ही खेतों की खड़ी फसल काट ली गई थी, अन्यथा करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता था।
पुरानी यादें ताजा: बता दें कि बीते बुधवार को भी महोड़िया क्षेत्र के खेतों में आग लगी थी, जिसमें कई किसानों की खड़ी फसलें जल गई थीं।
⚠️ प्रशासन की चुनौती
जिला मुख्यालय से आईं 3 दमकल गाड़ियां आग के विकराल घेरे को देखते हुए नाकाफी साबित हुईं। हवा की रफ्तार और खेतों में सूखी नरवाई ने आग को बुझाने में बड़ी बाधा उत्पन्न की। खबर लिखे जाने तक आग पर पूर्ण नियंत्रण पाने के प्रयास जारी थे।




