रायसेन: ‘हे प्रभु, इन्हें क्षमा करना’—श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया गुड फ्राइडे

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रायसेन | 03 अप्रैल, 2026 आज रायसेन शहर में मसीह समाज द्वारा प्रभु यीशु मसीह का बलिदान दिवस ‘गुड फ्राइडे’ अत्यंत श्रद्धा और मौन भक्ति के साथ मनाया गया। सांची मार्ग स्थित सेंट फ्रांसिस चर्च में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा के बाद शहर के मुख्य मार्गों से एक भव्य और विचारोत्तेजक जुलूस निकाला गया।

जीवंत झांकी ने जीवंत किया बलिदान का दृश्य

शाम 5 बजे चर्च में प्रार्थना के पश्चात जुलूस प्रारंभ हुआ, जो सागर तिराहे तक पहुँचा। जुलूस में सबसे आगे एक खुली जीप में प्रभु यीशु के अंतिम सफर की झांकी सजाई गई थी। समाज के बच्चों और युवाओं ने नाटिका के माध्यम से प्रभु यीशु को कोड़े मारने और क्रूस पर चढ़ाने के उन मार्मिक दृश्यों को दर्शाया, जिसे देखकर उपस्थित जनसमूह भावुक हो उठा।

प्रमुख विशेषताएं:

  • मौन पदयात्रा: समाज के लोग हाथों में पवित्र बाइबल और क्रॉस का चिन्ह लेकर मौन भाव से चल रहे थे।
  • सात वाणियों का मनन: पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु द्वारा क्रूस पर दी गई ‘सात अंतिम वाणियों’ का पाठ और मनन किया।
  • प्रमुख उपस्थिति: इस अवसर पर फादर अभिलाष, सेंट फ्रांसिस कॉन्वेंट स्कूल की प्राचार्य, किंडर स्कूल की प्रिंसिपल सहित बड़ी संख्या में ईसाई समाज के पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।

क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे?

ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन प्रभु यीशु ने मानवता के पापों के प्रायश्चित के लिए स्वयं को क्रूस पर बलिदान कर दिया था। इसे हॉली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है।

“हे प्रभु, इन्हें क्षमा करना, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।”

बाइबल के ये शब्द प्रभु यीशु की असीम दयालुता को दर्शाते हैं। समाज के वरिष्ठों ने बताया कि यह दिन हमें ईर्ष्या और क्रोध को त्याग कर क्षमा और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।


सेवा और क्षमा का संदेश

रायसेन के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं, जहाँ विश्व शांति और मानवता के कल्याण की कामना की गई। गुड फ्राइडे का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि मानवता की सेवा के लिए किया गया बलिदान ही सबसे बड़ा धर्म है।

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