सीहोर: किसान मुद्दों पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन; कलेक्टर के न आने पर कुत्ते को सौंपा ज्ञापन

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सीहोर | मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय पर गुरुवार को किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इस आंदोलन का नेतृत्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किया। आंदोलन के दौरान उस समय स्थिति नाटकीय हो गई जब घंटों इंतजार के बाद भी कलेक्टर मुलाकात के लिए नहीं पहुंचे, जिससे नाराज होकर सिंघार ने एक कुत्ते को ज्ञापन सौंप दिया।

मुख्य घटनाक्रम: जब ‘कलेक्टर’ लिखी तख्ती कुत्ते को पहनाई

आंदोलन के दौरान करीब ढाई घंटे तक कलेक्टर का इंतजार करने के बाद जब कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो नेता प्रतिपक्ष का गुस्सा फूट पड़ा।

  • अनोखा विरोध: उमंग सिंघार ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद एक कुत्ते के गले में ‘कलेक्टर’ लिखी तख्ती पहनाई और उसे ही अपना ज्ञापन सौंप दिया।
  • नाराजगी: ज्ञापन सौंपते हुए उन्होंने सांकेतिक रूप से प्रशासन की संवेदनहीनता पर कटाक्ष किया। इससे पहले वे वहां मौजूद अन्य अधिकारियों पर भी भड़कते नजर आए।

किसानों की प्रमुख माँगें और मुद्दे

जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती और उमंग सिंघार ने किसानों की बदहाली के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। आंदोलन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख माँगें उठाई गईं:

  • गेहूं खरीदी में देरी: मांग की गई कि गेहूं की सरकारी खरीदी तुरंत शुरू की जाए और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो।
  • MSP और भावांतर: किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिले और मंडी में बिक चुके गेहूं पर भावांतर योजना का लाभ दिया जाए।
  • ऋण वसूली पर रोक: सहकारी संस्थाओं द्वारा ऋण वसूली की अंतिम तिथि (31 मार्च) को आगे बढ़ाया जाए, क्योंकि सरकार के ‘कुप्रबंधन’ के कारण लगभग 50% किसान डिफाल्टर हो गए हैं।
  • बिजली बिल और बैंक वसूली: बिजली विभाग और बैंकों द्वारा की जा रही सख्त वसूली पर तत्काल रोक लगाकर राहत दी जाए।

“एक तरफ किसान की फसल नहीं बिक रही है, दूसरी तरफ उन पर बिल भरने और कर्ज चुकाने का दबाव बनाया जा रहा है। अब किसानों को अपने हक के लिए आवाज बुलंद करनी होगी।”

राजीव गुजराती, जिला कांग्रेस अध्यक्ष

प्रशासनिक रवैये पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने आए जनप्रतिनिधियों और किसानों से मिलने के लिए कलेक्टर के पास समय न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यही कारण था कि उन्हें विरोध स्वरूप कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठना पड़ा।

निष्कर्ष: सीहोर का यह आंदोलन न केवल किसानों की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का भी प्रतीक बन गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है।

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