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इस्लामाबाद। ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित ‘युद्धविराम’ (Ceasefire) वार्ता को लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को छावनी में बदल दिया गया है। शनिवार को होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक के लिए शहर में रेड अलर्ट जारी है। पाकिस्तान इस वार्ता को अपने राजनयिक कद को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के एक सुनहरे अवसर के रूप में देख रहा है।
सुरक्षा का घेरा: सेना के हाथों में कमान
अमेरिकी उपराष्ट्रपति और ईरानी प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कुछ इस प्रकार हैं:
- 10,000 सुरक्षाकर्मी तैनात: इसमें पाकिस्तानी सेना के जवान, अर्धसैनिक बल, इस्लामाबाद और पंजाब पुलिस शामिल है।
- मल्टी-लेयर सिक्योरिटी: रेड जोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है और सेना इस सुरक्षा घेरे का नेतृत्व कर रही है।
- रणनीतिक बैठक: सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर सुरक्षा रणनीति को अंतिम रूप दिया है।
दुनियाभर के पत्रकारों के लिए ‘रेड कारपेट’
पाकिस्तान इस मौके का फायदा अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के लिए करना चाहता है। इसी उद्देश्य से विदेशी मीडिया और पत्रकारों को वीजा नियमों में विशेष छूट देने का ऐलान किया गया है, ताकि इस ऐतिहासिक वार्ता की वैश्विक कवरेज सुगम हो सके।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर विशेष चिंताएं जताई गई थीं। इसी के मद्देनजर रेड जोन की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया है और मेहमानों के लिए ‘मल्टी-लेयर’ प्रोटेक्शन ग्रिड तैयार किया गया है।
क्यों अहम है यह वार्ता?
ईरान और अमेरिका के बीच शनिवार को होने वाली यह बातचीत मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो यह न केवल वैश्विक तनाव को कम करेगी, बल्कि पाकिस्तान को एक सफल ‘मध्यस्थ’ (Mediator) के रूप में भी स्थापित करेगी।
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