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गुना में सड़क पर बेहोश पड़े ड्राइवर को लोग नशेड़ी समझते रहे। समाजसेवी ने अस्पताल पहुंचाया, जहां पता चला शुगर लेवल 18 था। समय पर इलाज से बची जान।
गुना में इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एक समाजसेवी ने सड़क किनारे बेहोश पड़े ड्राइवर की जान बचाई। शिक्षा विभाग कार्यालय के सामने करीब 5 घंटे तक पड़े इस व्यक्ति को राहगीर नशेड़ी समझकर नजरअंदाज करते रहे।
सोमवार को यह व्यक्ति सड़क किनारे बेहोश हालत में पड़ा था, जिसके पास एक ट्राला भी खड़ा था। कुछ लोगों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई।
इसी दौरान समाजसेवी प्रमोद भार्गव को घटना की जानकारी मिली। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए उस व्यक्ति को टैक्सी के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि व्यक्ति का शुगर लेवल मात्र 18 था, जो बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है। तुरंत इलाज शुरू किया गया, जिसके बाद व्यक्ति को होश आ गया।

डॉक्टरों के अनुसार, अगर थोड़ी भी देर हो जाती तो उसकी जान जा सकती थी। होश में आने पर उसने अपना नाम नरेश रेगर बताया, जो राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का निवासी और सीमेंट ट्रक चालक है। उसे यह भी याद नहीं था कि वह कैसे बेहोश हुआ।
समाजसेवी प्रमोद भार्गव ने न सिर्फ उसे अस्पताल पहुंचाया, बल्कि उसके परिजनों और ट्रक मालिक को भी सूचना दी। साथ ही ट्राला सड़क से हटवाकर अन्य ड्राइवरों की मदद से उसकी देखभाल की व्यवस्था भी करवाई।
यह घटना बताती है कि समय पर मदद मिल जाए तो बड़ी दुर्घटना टाली जा सकती है।




