करोड़ों की शराब दुकानों के लिए नहीं मिल रहे ठेकेदार, सरकार के सामने बड़ी चुनौती

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drnewsindia.com/भोपाल। मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होने के बाद सरकार को जहां शराब बिक्री से बेहतर राजस्व की उम्मीद थी, वहीं अब उसे अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई चरणों की नीलामी के बावजूद प्रदेश की करीब 4 प्रतिशत शराब दुकानों के लिए अब तक ठेकेदार नहीं मिल पाए हैं। मध्य प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति से जहां राजस्व बढ़ाने की उम्मीद थी, वहीं जमीनी स्तर पर यह नीति चुनौती बनती नजर आ रही है। ठेकेदारों की कमी, बार-बार बदले जा रहे नियम और घटती बोली सरकार के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। अब देखना होगा कि सरकार शेष दुकानों की नीलामी पूरी करने के लिए क्या नई रणनीति अपनाती है।


3553 दुकानों में से 152 अब भी बिना ठेकेदार

प्रदेश में इस आबकारी वर्ष में कुल 3553 शराब दुकानों का संचालन होना है। इनमें से करीब 96 प्रतिशत दुकानों की नीलामी हो चुकी है, लेकिन अब भी 152 दुकानें ऐसी हैं, जिनका संचालन तय नहीं हो पाया है।

सरकार ने इस बार कोई नई दुकान नहीं खोलने का निर्णय लिया है, लेकिन शेष दुकानों के लिए ठेकेदार न मिलना बड़ी समस्या बन गया है।


कीमत 40% तक घटाई, फिर भी नहीं मिले खरीदार

सरकार ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए—

  • ऑफसेट प्राइस को पिछले साल के मुकाबले 40% तक कम किया
  • पहले पिछले साल की दरों पर नीलामी का प्रयास
  • फिर 5%, 10% और अंत में 40% तक कीमत घटाई

इसके बावजूद 152 दुकानों की नीलामी पूरी नहीं हो सकी। अधिकारियों के अनुसार, अधिक कीमत, स्थानीय बाजार की स्थिति और प्रतिस्पर्धा की कमी इसकी मुख्य वजह हैं।


1450 करोड़ की दुकानों पर सिर्फ 573 करोड़ के ऑफर

शेष बची दुकानों का कुल आरक्षित मूल्य करीब 1450 करोड़ रुपए है, लेकिन अब तक केवल 573 करोड़ रुपए के होल्ड ऑफर ही सामने आए हैं। इससे आबकारी विभाग की चिंता और बढ़ गई है।


1951 करोड़ के राजस्व का नुकसान

नीलामी अधूरी रहने से सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है—

  • लक्ष्य: 19,952 करोड़ रुपए
  • अब तक प्राप्त: 18,001 करोड़ रुपए
  • नुकसान: करीब 1,951 करोड़ रुपए

पिछले वर्षों में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है, जब सरकार को इतनी बड़ी संख्या में दुकानों के लिए कीमतें कम करनी पड़ी हैं।


नीलामी प्रक्रिया में बार-बार बदलाव

सरकार ने नीलामी प्रक्रिया में कई बार बदलाव किए—

  • 22 चरणों की नीलामी के बाद भी प्रक्रिया अधूरी
  • न्यूनतम बोली की सीमा खत्म कर टेंडर बुलाए
  • 40% से कम ऑफर मिलने पर सभी टेंडर रिजेक्ट
  • अब कीमत को 45% तक कम कर नए टेंडर आमंत्रित

इस बार लाइसेंस नवीनीकरण की व्यवस्था खत्म कर दी गई और कीमतों में 20% तक बढ़ोतरी की गई थी, जिससे ठेकेदारों की रुचि कम हो गई।

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