drnewsindia.com/सीहोर। अक्षय तृतीया (आखातीज) के अबूझ सावे पर जिले में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी कड़ी में आज राजस्व विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम दिवड़िया में दबिश देकर एक 17 वर्षीय नाबालिग बालिका का विवाह रुकवाकर उसे एक बड़ी सामाजिक कुरीति से बचा लिया।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा अमला
प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्राम दिवड़िया में आज (20 अप्रैल) अक्षय तृतीया के मौके पर एक बाल विवाह संपन्न होने जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक, पटवारी, सरपंच और ग्राम कोटवार की एक संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
जांच में नाबालिग निकली दुल्हन
जब टीम ने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की, तो पाया गया कि 21 वर्षीय युवक का विवाह जिस लड़की से हो रहा था, उसकी उम्र मात्र 17 वर्ष है। कानून के मुताबिक यह ‘बाल विवाह’ की श्रेणी में आता है, जो पूरी तरह अवैध है।
परिजनों को दी गई कानूनी चेतावनी
टीम ने वर और वधू दोनों पक्षों के परिजनों को सख्त लहजे में समझाया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की की शादी करना एक दंडनीय अपराध है। अधिकारियों ने बालिका के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों के बारे में भी परिजनों को जागरूक किया।
परिजनों ने दी लिखित सहमति
प्रशासन की समझाइश और कानूनी कार्रवाई के डर के बाद, दोनों पक्षों ने अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने लिखित सहमति दी कि जब तक बालिका 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेती, तब तक उसका विवाह नहीं किया जाएगा।
कार्यवाही में ये रहे शामिल
इस सफल कार्रवाई में मुख्य रूप से शामिल रहे:
- प्रीति मेहरा (पर्यवेक्षक, महिला एवं बाल विकास विभाग)
- दीपक राठौर (विदिशा सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन)
- ग्राम सरपंच, पटवारी, ग्राम कोटवार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।
सीहोर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और निगरानी लगातार जारी रहेगी।




