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सीहोर। जिले के बिजोरी गांव में सोमवार देर रात भीषण आगजनी की घटना सामने आई है। एक किसान के खेत में रखे लकड़ियों के ढेर में अज्ञात कारणों से लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस हादसे में न केवल लाखों रुपये की कीमती लकड़ियां जल गईं, बल्कि मेड़ पर लगे फलदार और छायादार पेड़ भी राख के ढेर में तब्दील हो गए।
ग्रामीणों के प्रयास रहे विफल
देर रात जब ग्रामीण सो रहे थे, तभी अचानक लपटें उठती देख अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने निजी संसाधनों और बोरवेल की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सब कुछ जलकर खाक हो गया। पीड़ित किसान को इस घटना से बड़ा आर्थिक आघात लगा है।
जिले में आगजनी का ‘हॉटस्पॉट’ बना सीहोर: 30 दिन, 15 मामले
बढ़ते तापमान और प्रशासनिक अनदेखी के बीच सीहोर जिला आगजनी की घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। पिछले एक महीने के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- 15 से अधिक घटनाएं: बीते 30 दिनों में जिले के अलग-अलग हिस्सों में आगजनी दर्ज की गई।
- गेहूं की फसल बर्बाद: हाल ही में भैरूंदा क्षेत्र में कई एकड़ खड़ी फसल जल गई थी।
- इछावर में शॉर्ट सर्किट: बिजली विभाग की लापरवाही और ढीले तारों के कारण खेतों में आग लगने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

क्यों धधक रहे हैं खेत? मुख्य कारण और चुनौतियां
भीषण गर्मी और मानवीय गलतियां इस तबाही का मुख्य कारण बन रही हैं:
| मुख्य कारण | प्रभाव |
| 42°C+ तापमान | अत्यधिक गर्मी से सूखी लकड़ियां और नरवाई (फसल अवशेष) बारूद की तरह संवेदनशील हो गए हैं। |
| बिजली के ढीले तार | खेतों के ऊपर से गुजरने वाले ढीले तारों से निकलने वाली चिंगारी फसलों को राख कर रही है। |
| नरवाई जलाना | प्रतिबंध के बावजूद खेतों में आग लगाना अन्य खेतों और बागानों के लिए काल बन रहा है। |

प्रशासन की सलाह: बरतें सावधानी
लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है:
- सतर्कता: खेतों के आसपास पानी के टैंकर और अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था रखें।
- सूचना: बिजली के तारों में स्पार्किंग या ढीलेपन की जानकारी तुरंत बिजली विभाग को दें।
- प्रतिबंध: खेतों में नरवाई (पराली) बिल्कुल न जलाएं, यह कानूनी अपराध भी है।
संपादकीय टिप्पणी: भीषण गर्मी के इस दौर में एक छोटी सी चिंगारी किसान की साल भर की मेहनत को खाक कर सकती है। सावधानी ही एकमात्र बचाव है।





