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भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सूरज के तेवर तीखे हो चुके हैं। शहर का पारा 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जिससे सड़कों पर निकलना दूभर हो गया है। इस भीषण गर्मी के बीच सबसे बड़ी आफत दोपहिया वाहन चालकों पर आ पड़ी है, जिन्हें तपती धूप में चौराहों पर लंबे ट्रैफिक सिग्नल का सामना करना पड़ रहा है।
⏱️ 1 मिनट का सिग्नल… और झुलसाने वाली धूप
शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल का समय अभी भी एक मिनट या उससे ज़्यादा का है। दोपहर के वक्त जब आसमान से आग बरस रही होती है, तब लाल बत्ती पर एक मिनट खड़े रहना किसी सजा से कम नहीं लगता।
- परेशानी: लंबे सिग्नल टाइम की वजह से लोगों को सीधी धूप और गर्म थपेड़ों (लू) का सामना करना पड़ रहा है।
- मांग: वाहन चालकों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस जानलेवा गर्मी को देखते हुए सिग्नलों की टाइमिंग को तुरंत कम किया जाए।

⛺ दोपहर में सिग्नल बंद हों या लगे टेंट? जनता की दो राय
गर्मी से राहत पाने के लिए शहर के लोगों ने प्रशासन के सामने कुछ सुझाव रखे हैं, हालांकि इसे लेकर आम जनता की राय थोड़ी अलग है:
राय 1: “टाइमिंग कम हो या दोपहर में सिग्नल बंद किए जाएं” ट्रैफिक सिग्नल पर ग्रीन लाइट होने का इंतज़ार कर रहे स्थानीय निवासी नरेंद्र का कहना है— “गर्मी बहुत बढ़ गई है, इसलिए सिग्नल का टाइम कम किया जाना चाहिए। चौराहों पर शेड या नेट लगाने में खर्चा तो बहुत होता है, लेकिन अगर सरकार चाहे तो जनता की राहत के लिए इसे लगा सकती है।” कुछ लोगों का यह भी मानना है कि दोपहर के बेहद गर्म घंटों में कुछ प्रमुख चौराहों पर सिग्नल अस्थायी रूप से बंद कर देने चाहिए।
राय 2: “सिग्नल बंद करना विकल्प नहीं, ग्रीन नेट लगाए प्रशासन” दूसरी ओर, वाहन चालक पीहू सिंह ठाकुर का मानना है कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखना ज़रूरी है। उन्होंने कहा— “ट्रैफिक सिग्नल बंद करना कोई सही विकल्प नहीं है, इससे जाम और हादसे बढ़ेंगे। इसके बजाय प्रशासन को चौराहों पर हरे रंग के नेट (Green Net) या शेड लगाने चाहिए, ताकि सिग्नल पर रुकने वाले लोगों को सीधी धूप से राहत मिल सके।”
📋 प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियाँ
अब देखना यह है कि क्या भोपाल नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस इस भीषण गर्मी में जनता को राहत देने के लिए कोई कदम उठाते हैं। क्या भोपाल के प्रमुख चौराहों पर अन्य बड़े शहरों की तर्ज पर ‘ग्रीन शेड’ देखने को मिलेंगे?
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