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मध्य प्रदेश के आम नागरिकों की जेब पर एक बार फिर भारी बोझ पड़ा है। ऑयल कंपनियों ने पिछले 11 दिनों के भीतर चौथी बार पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ा दिए हैं। आज यानी 25 मई 2026 को पेट्रोल में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है।
इस बढ़ोतरी के बाद एमपी के कई शहरों में डीजल ₹100 के आंकड़े को पार कर गया है, वहीं पेट्रोल ₹116 प्रति लीटर या उससे अधिक बिक रहा है।
📍 एमपी के बड़े शहरों में आज के लाइव रेट्स
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें अब इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल (प्रति लीटर) | डीजल (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| उज्जैन (सबसे महंगा) | 115.03 रुपए | 100.11 रुपए |
| भोपाल | 114.65 रुपए | 99.74 रुपए |
| इंदौर | 114.54 रुपए | 99.57 रुपए |
⚠️ नोट: जबलपुर और ग्वालियर में भी कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में ज्यादा वैट (VAT) होने के कारण सीमावर्ती उत्तर प्रदेश की तुलना में एमपी में तेल काफी महंगा मिल रहा है।

📈 टाइमलाइन: मई महीने में कब-कब लगी ‘आग’?
सिर्फ 11 दिनों के भीतर तेल कंपनियों ने करीब ₹8 प्रति लीटर तक दाम बढ़ा दिए हैं। देखिए इस महीने का पूरा ग्राफ:
- 15 मई 2026 (पहली बढ़ोतरी): करीब ₹3 प्रति लीटर का इजाफा।
- 19 मई 2026 (दूसरी बढ़ोतरी): करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि।
- 23 मई 2026 (तीसरी बढ़ोतरी): करीब 87 से 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी।
- 25 मई 2026 (चौथी बढ़ोतरी): करीब ₹3-3 प्रति लीटर की भारी बढ़त।
⚠️ डीजल महंगा होने के 3 बड़े ‘साइड इफेक्ट्स’
डीजल की कीमतों में लगी यह आग सीधे तौर पर आम जनता की रसोई और जेब पर असर डालेगी:
- महंगी होंगी सब्जियां और राशन: ट्रक और टेम्पो का मालभाड़ा अगले 2-3 दिनों में बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और रोजमर्रा का राशन महंगा हो जाएगा।
- खेती की लागत में इजाफा: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों का खर्च बढ़ेगा, जिससे अनाज उत्पादन की लागत बढ़ेगी।
- सफर होगा महंगा: सार्वजनिक परिवहन (Bus-Auto) और स्कूल बसों के किराए में भी जल्द बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
❓ क्यों अचानक बढ़ रहे हैं दाम?
1. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का संकट
ईरान-अमेरिका तनाव से पहले जो कच्चा तेल (Crude Oil) 70 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस उतार-चढ़ाव के कारण तेल कंपनियाँ भारी दबाव में थीं।
2. कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का घाटा
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, मार्च 2024 से दाम स्थिर रहने और लोकसभा चुनावों के दौरान की गई ₹2 की कटौती की वजह से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियाँ भारी घाटे में चल रही थीं। अपने घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने यह कदम उठाया है।

📊 समझिए: आप तक पहुँचते-पहुँचते 4 गुना क्यों हो जाती है कीमत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल पर देश में कई तरह के टैक्स और कमीशन जुड़ते हैं:
- बेस प्राइस: विदेशों से आयात किए गए कच्चे तेल की वास्तविक कीमत।
- रिफाइनिंग और कंपनी मार्जिन: क्रूड को पेट्रोल-डीजल में बदलने का खर्च और कंपनियों का मुनाफा।
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलते ही केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है (जो सभी राज्यों में समान होती है)।
- डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिकों को मिलने वाला निश्चित कमीशन।
- राज्य सरकार का वैट (VAT): हर राज्य अपने हिसाब से लोकल सेल्स टैक्स लगाता है। चूंकि एमपी में वैट की दरें बहुत ज्यादा हैं, इसलिए यहाँ तेल अन्य राज्यों से महंगा है।
💬 सियासी पारा गरमाया: कमलनाथ ने सरकार को घेरा
इस बेतहाशा बढ़ोतरी पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
“हमारे नेता श्री राहुल गांधी ने 15 मई को पहली बढ़ोतरी के समय ही आगाह कर दिया था कि यह सिर्फ शुरुआत है और कीमतें लगातार बढ़ेंगी। उन्होंने आर्थिक संकट पर समय रहते एक्शन लेने को कहा था, लेकिन सरकार गहरी नींद में सोई रही और अब इसका पूरा बोझ जनता पर डाल दिया गया है।”





