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सीहोर: पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पवित्र महीने में भक्ति और अनुष्ठानों का दौर जारी है। इसी कड़ी में आज (गुरुवार) सुबह 9:00 बजे से शहर के कोलीपुरा स्थित श्री सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर परिसर में भव्य तुलसी पूजन सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
इस पावन आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
🦁 गणेश मंदिर पहुंचकर दिया आमंत्रण
संत माधवदास महाराज के मार्गदर्शन में यज्ञाचार्य पंडित कुणाल व्यास और पवन केवट ने शहर के प्राचीन गणेश मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की। गत दिनों संपन्न हुए यज्ञ की पूर्णता और आज होने वाले तुलसी पूजन को लेकर भगवान श्री गणेश को श्रद्धापूर्वक आमंत्रण पत्र भेंट किया गया।

✨ अधिक मास का महत्व: क्यों खास है यह महीना?
संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित (मामा) ने बताया कि हिंदू धर्म में अधिक मास का एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है:
- वर्जित कार्य: इस पूरे महीने में शादी-विवाह, गृह प्रवेश, और यज्ञोपवीत (जनेऊ) जैसे मांगलिक कार्य निषेध होते हैं।
- क्या करना है फलदायी: यह समय दान, पुण्य, धर्म-कर्म, पूजा-पाठ और श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के लिए अति श्रेष्ठ माना गया है।
- ब्रजवास का पुण्य: पुराणों के अनुसार, अधिक मास के दौरान सभी तीर्थ ब्रज क्षेत्र में निवास करते हैं। इसलिए इस समय मथुरा, वृंदावन, गोकुल और बरसाना की यात्रा करने का विशेष महत्व है।

🌿 घर में क्यों जरूरी है तुलसी पूजन?
“तुलसी की जड़ में सभी तीर्थ, मध्य में सभी देवता और ऊपरी शाखाओं में चारों वेद स्थित हैं।”
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी और तुलसी जी का सीधा संबंध भगवान विष्णु (श्री नारायण) से है। जिस घर में नियमित रूप से तुलसी जी का पूजन विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक होता है, वहाँ हमेशा सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का वास रहता है।
- आरोग्य की प्राप्ति: भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी दल (पत्तियों) के अधूरी मानी जाती है।
- सकारात्मक ऊर्जा: तुलसी का पौधा घर-आंगन के वातावरण को पवित्र, सुखमय और स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। प्रतिदिन तुलसी में जल देना आरोग्यदायक माना गया है।
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