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वाशिंगटन (स्पेस डेस्क): अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ (NASA) ने अगले साल के अंत में होने वाले अपने ऐतिहासिक आर्टेमिस-3 (Artemis III) मिशन के लिए चालक दल (क्रू मेंबर्स) के नामों की घोषणा कर दी है। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक इतालवी अंतरिक्ष यात्री को शामिल किया गया है।
यह मिशन मानव इतिहास में इसलिए भी बेहद खास होने वाला है क्योंकि इसके जरिए दुनिया के दो सबसे बड़े दिग्गजों—एलन मस्क की स्पेसएक्स (SpaceX) और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) के चंद्रयानों का पहली बार अंतरिक्ष की कक्षा में लाइव परीक्षण किया जाएगा।
👨हीरोज़ ऑफ आर्टेमिस-3: ये हैं मिशन के 4 मुख्य अंतरिक्ष यात्री
ह्यूस्टन में आयोजित एक भव्य समारोह में नासा के प्रशासक जेरेड आइज़ैकमान ने इस 4 सदस्यीय टीम के नामों और उनकी भूमिकाओं का आधिकारिक ऐलान किया:
- कमांडर: रैंडी ब्रेसनिक (अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री)
- पायलट: लुका परमिटानो (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी – ESA के इतालवी अंतरिक्ष यात्री)
- मिशन विशेषज्ञ 1: आंद्रे डगलस (अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री)
- मिशन विशेषज्ञ 2: फ्रैंक रुबियो (अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री)
बैकअप प्लान भी तैयार: नासा ने इस मुख्य टीम के साथ-साथ अंतरिक्ष यात्री बॉब हाइन्स को ‘बैकअप क्रू मेंबर’ के रूप में नामित किया है। बॉब भी मुख्य टीम के साथ हर तरह की कठिन ट्रेनिंग का हिस्सा रहेंगे।

🌌 मस्क और बेजोस के बीच दिखेगा स्पेस-वार! क्यों खास है यह मिशन?
यह मिशन सिर्फ चांद की खोज के लिए नहीं, बल्कि स्पेस टेक्नोलॉजी के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है। अंतरिक्ष में पहली बार ये बड़े प्रयोग देखने को मिलेंगे:
- नाज़ुक डॉकिंग का प्रदर्शन: इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष में एलन मस्क की कंपनी ‘स्पेसएक्स’ और जेफ बेजोस की कंपनी ‘ब्लू ओरिजिन’ के लैंडर्स (चंद्रयानों) का एक-एक करके बेहद जटिल और संवेदनशील डॉकिंग (दो यानों को आपस में जोड़ना) टेस्ट किया जाएगा।
- कमर्शियल स्पेसक्राफ्ट का टेस्ट: पहली बार नासा अपने सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट में दो प्राइवेट कंपनियों के चंद्रयानों की क्षमता को सीधे अंतरिक्ष की कक्षा में परखेगा।
📅 कब लॉन्च होगा मिशन?
नासा की योजना के अनुसार, आर्टेमिस-III मिशन को अगले साल (2027) के अंत तक लॉन्च करने की तैयारी है। इस मिशन की सफलता भविष्य में मानव को दोबारा चांद पर स्थायी रूप से बसाने और वहां से मंगल ग्रह (Mars) तक का रास्ता खोजने में मील का पत्थर साबित होगी।





