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नई दिल्ली। देश में ग्रीन फ्यूल (हरित ईंधन) को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एथेनॉल मिश्रित (Ethanol-blended) पेट्रोल के कुछ खास वेरिएंट्स पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह से माफ कर दिया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Union Finance Ministry) द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस छूट के बाद अब एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इन चार ग्रेड्स पर एक्साइज ड्यूटी की दर ‘शून्य’ (Nil Rate) हो जाएगी।
इन वेरिएंट्स को मिली एक्साइज ड्यूटी से राहत
सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की अधिक मात्रा वाले निम्नलिखित चार वेरिएंट्स को टैक्स के दायरे से बाहर किया है:
- 22 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22)
- 25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E25)
- 27 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E27)
- 30 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E30)

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? (मुख्य उद्देश्य)
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे देश को तीन बड़े फायदे होंगे:
| मुख्य उद्देश्य | होने वाला फायदा |
| आयात पर निर्भरता कम करना | भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल (Crude Oil) विदेशों से आयात करता है। एथेनॉल का मिश्रण बढ़ने से महंगे तेल आयात पर देश की निर्भरता घटेगी। |
| प्रदूषण में कमी | पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) में भारी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। |
| किसानों और घरेलू उद्योगों को लाभ | भारत में एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से होता है। इस फैसले से घरेलू स्तर पर निर्मित एथेनॉल की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों और लोकल मैन्युफैक्चरर्स को होगा। |
‘एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम’ को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार का यह फैसला भारत के ‘एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम’ को जमीन पर और मजबूत करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। टैक्स छूट मिलने से तेल कंपनियां अब ऊंचे स्तर के एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को बाजार में उतारने और उसे बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर सकेंगी।





