वैश्विक हलचल: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा बयान; “दुनिया पर पड़ रहा है युद्धों का असर, कूटनीति ही एकमात्र रास्ता”

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फिनलैंड (Kultaranta Talks): दुनियाभर में चल रहे अलग-अलग युद्धों और तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत रुख रखा है। फिनलैंड में आयोजित प्रसिद्ध ‘कुलतारंता टॉक्स’ (Kultaranta Talks) में हिस्सा लेते हुए उन्होंने साफ कहा कि आज के दौर में चल रहे संघर्षों का असर सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इसकी मार झेल रही है।

निचे पढ़ें इस दौरे और चर्चा की 5 बड़ी बातें:

1. वैश्विक संकट से निपटने का फॉर्मूला

चर्चा के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया को इस समय मजबूत और लचीली सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला), लगातार राजनयिक प्रयासों और बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सख्त जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को युद्ध के असर को कम करने और बातचीत (Diplomacy) का माहौल बनाने के लिए लगातार काम करना होगा।

2. भारत के एनर्जी फैसलों पर दो टूक

जब बात एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) पर आई, तो डॉ. जयशंकर ने बिना किसी झिझक के दोहराया:

“भारत के ऊर्जा संबंधी फैसले पूरी तरह से राष्ट्रीय हित से तय होते हैं। हमारी ईंधन और ऊर्जा की खरीदारी हमेशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वह हमारे देश के लिए कितनी सस्ती और आसानी से उपलब्ध है।”

3. खाड़ी देश (Gulf Region) और भारत के रिश्ते

विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि नई दिल्ली की विदेश नीति में खाड़ी क्षेत्र हमेशा केंद्र में रहता है। इसका कारण मजबूत जन-साधारण के संबंध, ऊर्जा सहयोग और लगातार बढ़ता रणनीतिक व रक्षा तालमेल है। इसी सिलसिले में उन्होंने यूएई (UAE) की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेइबेह से भी मुलाकात की और दोनों देशों के साझा हितों पर चर्चा की।

4. भारत और यूरोप के बीच ‘ऐतिहासिक’ साल

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में आई तेजी को बताते हुए उन्होंने कुछ बड़ी उपलब्धियां गिनाईं, जो इसी साल पूरी हुई हैं:

  • फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): भारत और EU ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी कर ली है।
  • रणनीतिक और रक्षा साझेदारी: सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
  • मोबिलिटी कोऑपरेशन फ्रेमवर्क: दोनों क्षेत्रों के बीच लोगों के आने-जाने और काम करने को आसान बनाने के लिए इसे अंतिम रूप दिया गया।

5. फिनलैंड के राष्ट्रपति से मुलाकात और डिजिटल पार्टनरशिप

इस यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि भारत और फिनलैंड डिजिटलाइजेशन (Digitalisation) और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) के क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

📌 क्विक फैक्ट्स (Quick Facts):

  • दौरा: विदेश मंत्री बुल्गारिया के बाद अपने दो देशों के दौरे के आखिरी पड़ाव पर फिनलैंड पहुंचे थे।
  • कुलतारंता टॉक्स क्या है? यह फिनलैंड के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित एक वार्षिक संवाद (Annual Dialogue) है, जहां दुनिया के बड़े नेता वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हैं।

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