मानसून के बीच बड़ी खबर: सरकार ने अचानक रोकी मोबाइल ‘आपदा चेतावनी सेवा’, जानें NDMA ने क्यों लिया यह फैसला

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drnewsindia.com

नई दिल्ली: देशभर में मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई राज्यों में भारी बारिश का दौर शुरू हो चुका है। इसी बीच, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने देश के आधुनिक इमरजेंसी वॉर्निंग सिस्टम यानी ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज’ (Cell Broadcasting Services) को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।

इस फैसले के बाद अब आपदा के समय मोबाइल पर आने वाले तेज बीप वाले ऑटोमैटिक अलर्ट्स फिलहाल नहीं मिलेंगे।

⚠️ क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? (The Reason)

हाल ही में आपने भी अपने फोन पर एक तेज अलार्म के साथ ‘Emergency Alert: Severe’ का फ्लैश मैसेज देखा होगा। सरकार इसका ट्रायल कर रही थी, लेकिन मानसून के ठीक बीच इसे रोकने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

  • तकनीकी खामियां (Technical Glitches): ट्रायल के दौरान सिस्टम में कुछ गंभीर तकनीकी समस्याएं सामने आईं। कई इलाकों में अलर्ट समय पर नहीं पहुंच रहे थे, तो कहीं बिना वजह बार-बार एक ही मैसेज ट्रिगर हो रहा था।
  • पैनिक की स्थिति: तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलत या देर से मिलने वाले अलर्ट्स से आम जनता के बीच भगदड़ या पैनिक न फैले, इसलिए NDMA ने इसे अभी होल्ड पर रखने का फैसला किया है।
  • पीक सीजन में रिस्क नहीं: मानसून और बाढ़ के इस संवेदनशील सीजन में सरकार किसी भी तरह के दोषपूर्ण (Defective) सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना चाहती।

📱 क्या होती है ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग सर्विस’?

यह भारत का सबसे आधुनिक आपदा चेतावनी सिस्टम है। इसके तहत दूरसंचार विभाग (DoT) और NDMA मिलकर काम करते हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि:

  • इसके लिए मोबाइल में इंटरनेट या नेटवर्क डेटा की जरूरत नहीं होती।
  • यह सीधे मोबाइल टावर के जरिए उस इलाके के सभी फोन्स पर एक साथ तेज आवाज (लाउड अलार्म) के साथ फ्लैश मैसेज भेजता है।
  • इसका इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात (Cyclone), और भूकंप जैसी आपातकालीन स्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए किया जाना तय हुआ था।

💡 अब कैसे मिलेगी आपको चेतावनी? (Alternative Ways)

जब तक सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम की तकनीकी कमियों को सुधारा जा रहा है, तब तक आम जनता को मौसम और आपदा की जानकारी इन पारंपरिक माध्यमों से मिलती रहेगी:

  1. IMD और मौसम ऐप्स: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ‘मौसम’ (Mausam) और ‘दामिनी’ (Damini) ऐप्स काम करते रहेंगे।
  2. लोकल SMS अलर्ट: टेलीकॉम कंपनियां प्रभावित इलाकों में सामान्य टेक्स्ट मैसेज (SMS) के जरिए चेतावनी भेजती रहेंगी।
  3. रेडियो और टीवी: क्षेत्रीय समाचारों और रेडियो घोषणाओं के जरिए अपडेट्स जारी रहेंगे।

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