विश्व वायु दिवस आज: भारत कर रहा है वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी; गोवा में जुटेंगे दिग्गज, जानें क्या है इस बार की खास थीम और एजेंडा

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नेशनल डेस्क। आज पूरी दुनिया में ‘विश्व वायु दिवस’ (Global Wind Day) मनाया जा रहा है। स्वच्छ पर्यावरण, पवन ऊर्जा (Wind Energy) को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से निपटने में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित करने के लिए हर साल 15 जून को यह विशेष दिवस मनाया जाता है।

इस वर्ष का विश्व वायु दिवस भारत के लिए बेहद खास है, क्योंकि भारत आज गोवा में भव्य ‘विश्व वायु दिवस 2026 सम्मेलन’ की मेजबानी कर रहा है। इस वैश्विक मंच पर पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अपनी ताकत और भविष्य के रोडमैप को दुनिया के सामने रखेगा।

इस वर्ष (2026) की थीम:

“पवन ऊर्जा: महत्वाकांक्षा से गतिशीलता की ओर” (Wind Energy: From Ambition to Action) इस वर्ष की थीम यह संदेश देती है कि अब समय सिर्फ बड़ी महत्वाकांक्षाएं या लक्ष्य तय करने का नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने और उसमें तेजी (गतिशीलता) लाने का है।

गोवा सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और एजेंडा:

  • दिग्गजों का महामंथन: इस सम्मेलन में केंद्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, बिजली क्षेत्र के नियामक (Regulators), विंड एनर्जी डेवलपर्स, टरबाइन निर्माता और देश-विदेश के ऊर्जा विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। इसमें कई महत्वपूर्ण पूर्ण सत्र (Plenary Sessions) और पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
  • व्यावहारिक उपायों पर फैसला: इस विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य पवन ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन (Implementation) में तेजी लाना, मौजूदा व्यवस्था में सुधार करना और भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए ठोस व व्यावहारिक कदम उठाना है।
  • भविष्य की प्राथमिकताओं पर रोडमैप: यह सम्मेलन भारत की पवन ऊर्जा यात्रा के अगले चरण की प्रमुख प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा कि कैसे देश 2030 तक अपने रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्यों को पूरा करेगा।

खास रिपोर्ट होगी जारी: ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

इस सम्मेलन के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिसका शीर्षक है— ‘वैश्विक बाजारों के लिए भारत के पवन टरबाइन निर्यात को बढ़ावा देना’

यह रिपोर्ट इस बात पर केंद्रित होगी कि कैसे भारत पवन ऊर्जा के उपकरणों और टरबाइन के निर्माण में आत्मनिर्भर बनकर दुनिया के अन्य देशों को बड़े पैमाने पर निर्यात (Export) कर सकता है। इससे न केवल देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान मिलेगी।

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