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नई दिल्ली। भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति (थोक महंगाई दर) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। नए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में देश की थोक महंगाई दर वार्षिक आधार पर उछलकर 9.68% पर पहुंच गई है, जो कि अप्रैल महीने में पुराने आंकड़ों के मुताबिक 8.26% दर्ज की गई थी।
यह पिछले एक दशक से भी अधिक समय में भारत की थोक मुद्रास्फीति श्रृंखला का पहला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण संशोधन है। केंद्र सरकार ने इस बार महंगाई के आकलन के लिए इसके आधार वर्ष (Base Year) को 2012 से बदलकर 2023 कर दिया है।
इन प्रमुख कारणों से भड़की थोक महंगाई
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने महंगाई में आई इस भारी तेजी के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों की बढ़ती कीमतें जिम्मेदार हैं:
- कच्चा तेल और गैस: खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में बड़ा उछाल।
- औद्योगिक उत्पाद: रसायन, रासायनिक उत्पाद और बुनियादी धातुओं (Basic Metals) के विनिर्माण की बढ़ती लागत।
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी लगातार तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने हुए हैं, जिससे भारत में आयातित मुद्रास्फीति (Imported Inflation) घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रही है।

प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति: ईंधन और बिजली में सबसे बड़ा उछाल
महंगाई के इस नए आंकड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में देखें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| सेक्टर/श्रेणी | अप्रैल में दर | मई में दर |
| ईंधन और बिजली (Fuel & Power) | 24.89% | 30.33% |
| विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products) | 6.68% | 7.48% |
| प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles) | 3.78% | 5.00% |
नोट: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में सबसे अधिक भार (Weightage) रखने वाले ‘विनिर्मित उत्पादों’ की दर में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में बाजार में रोजमर्रा की कई चीजें और महंगी हो सकती हैं।





