West Asia Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौता; थम सकता है 4 महीने का युद्ध, जेनेवा में शुक्रवार को होंगे दस्तखत

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वाशिंगटन / तेहरान: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ी और सकारात्मक कूटनीतिक कामयाबी सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने पिछले लगभग चार महीनों से चले आ रहे युद्ध और संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक ‘फ्रेमवर्क एग्रीमेंट’ (समझौता प्रारूप) का आधिकारिक एलान कर दिया है।

दोनों देशों के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एक सहमति पत्र (MoU) पर पहले ही डिजिटल हस्ताक्षर हो चुके हैं, और इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आगामी शुक्रवार को जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में आयोजित किया जाएगा।

खुल जाएगा ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’, कच्चे तेल के दामों में गिरावट

इस समझौते के धरातल पर उतरते ही दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार को एक बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है:

  • समुद्री मार्ग होगा बहाल: समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
  • परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा: इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक चलने वाली एक नए दौर की बातचीत (Negotiations) भी शुरू होगी।
  • बाजार में लौटी रौनक: इस शांति समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तत्काल गिरावट दर्ज की गई है। तेल सप्लाई बहाल होने की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट ने इस पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति ने किया फैसले का स्वागत

इस ऐतिहासिक कदम पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बयान भी सामने आए हैं:

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि समझौते से जुड़े विस्तृत विवरण शुक्रवार को जेनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह के बाद ही सार्वजनिक किए जाएंगे। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक ‘असाधारण और बड़ा कदम’ बताया है।
  • ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी इस सहमति का स्वागत करते हुए इसे युद्ध खत्म करने का एक जरूरी जरिया बताया, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी फाइनल एग्रीमेंट (अंतिम समझौता) पूरी तरह तैयार होना बाकी है।

रास्ते खुले पर कुछ मोर्चों पर अब भी सस्पेंस बरकरार

भले ही यह एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है, लेकिन जानकारों का मानना है कि रास्ते में अभी कुछ पेच और चुनौतियां बाकी हैं:

  • टैक्स और टोल पर मतभेद: ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के प्रबंधन को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद दिख रहे हैं। वाशिंगटन (अमेरिका) का कहना है कि यह जलमार्ग बिना किसी टैक्स या टोल के पूरी तरह खुला रहना चाहिए, जबकि ईरानी अधिकारियों का संकेत है कि भविष्य में इस पर शुल्क लगाने पर विचार किया जा सकता है।
  • लेबनान संकट की चुनौती: पश्चिम एशिया में शांति के इस प्रयास के बीच लेबनान में स्थिति अभी भी नाजुक है। इजरायल ने संकेत दिए हैं कि वह इस कूटनीतिक पहल के बावजूद कुछ इलाकों में अपनी सैन्य स्थिति बनाए रखेगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि लेबनान में शांति स्थापित होना इस पूरे समझौते का एक अटूट हिस्सा है।

आगे क्या होगा? आने वाले कुछ दिन और जेनेवा में होने वाली आधिकारिक बैठक यह तय करेगी कि यह शुरुआती फ्रेमवर्क क्या पश्चिम एशिया में एक स्थायी और मजबूत शांति समझौते का रूप ले पाएगा या नहीं।

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