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मध्यप्रदेश समाचार / मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सीहोर (मंत्रालय) में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के समग्र और समावेशी विकास को गति देने के लिए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। यह आगामी पांच वर्षों (2026-2031) में राज्य के सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्य निर्णयों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
1. इंदौर मेट्रो रेल परियोजना: ₹19,472.29 करोड़ की मंजूरी
इंदौर मेट्रो के विस्तार और सुचारू क्रियान्वयन के लिए कैबिनेट ने पुनरीक्षित लागत को मंजूरी दी है।
- संशोधित लागत: मूल लागत ₹7,500.80 करोड़ में ₹5,388.58 करोड़ अतिरिक्त जोड़कर अब कुल लागत ₹12,889.38 करोड़ कर दी गई है।
- अतिरिक्त वित्त पोषण: पीपीपी (PPP) घटक और आंतरिक ऋण को मिलाकर ₹6,582.91 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- इसमें भारत सरकार और म.प्र. शासन की अतिरिक्त इक्विटी, केंद्रीय करों के लिए अधीनस्थ ऋण और बैंकों से प्राप्त ऋण शामिल हैं।

2. मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026
राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी (Philanthropic) निवेश को आकर्षित करने के लिए इस नीति के प्रस्ताव पर 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया गया है।
- उद्देश्य: विशेषज्ञ डॉक्टरों को तैयार करना, गरीब मरीजों को मुफ्त/गुणवत्तापूर्ण इलाज की गारंटी देना और मरीजों का अन्य राज्यों में पलायन रोकना।
🩺 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का आउटसोर्सिंग (पायलट प्रोजेक्ट)
- जिले: रीवा, देवास और गुना।
- योजना: जिन केंद्रों में डॉक्टरों के पद खाली हैं, उन्हें आउटसोर्स मॉडल पर चलाया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को छोटी बीमारियों के लिए जिला अस्पताल न भागना पड़े। 5 साल बाद इसका मूल्यांकन कर अन्य जिलों में विस्तार होगा।

3. प्रोजेक्ट टाइगर, एलिफेंट और ग्रामीण पुनर्वास: ₹2,381.15 करोड़
16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-2031) के लिए वन्य-प्राणी संरक्षण और विस्थापन के लिए बजट जारी किया गया है:
- संरक्षण कार्य (₹1,131.15 करोड़): कूनो राष्ट्रीय उद्यान, गांधीसागर अभयारण्य और टाइगर रिजर्व में हैबीटेट सुधार, जल स्रोतों का विकास और हाथियों के प्रबंधन पर खर्च होंगे।
- पुनर्वास मुआवजा (₹1,250 करोड़): संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती, रातापानी टाइगर रिजर्व, कूनो और ओरछा अभयारण्य के 94 संवेदनशील गांवों के विस्थापन और ग्रामीणों को मुआवजा देने के लिए।
4. श्रमिक कल्याण योजनाएं: ₹531.78 करोड़
श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और औद्योगिक सुरक्षा के लिए 5 वर्षों तक विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जाएगा:
- श्रम आयुक्त कार्यालय और कानूनों के क्रियान्वयन के लिए अमला।
- इंदौर स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण।
- बाल श्रमिक सर्वेक्षण, बंधक मजदूरों का पुनर्वास और प्रवासी श्रमिक आयोग के लिए बजट।

5. जनजातीय विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सुविधाएं: ₹687 करोड़
- प्रदेश के 22 जिलों में कार्यरत 32 अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं द्वारा संचालित हॉस्टल, आश्रम शाला, बालवाड़ी और आरोग्य केंद्रों के संचालन के लिए सहायता।
- योजना में दिव्यांगजनों को प्राथमिकता और आवासीय सुविधाओं में जेंडर समानता (Gender Equality) का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
6. रेशम उत्पादन और स्थानीय रोजगार: ₹639.25 करोड़
- वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक रेशम संचालनालय की 8 प्रमुख योजनाओं को निरंतर रखने की मंजूरी।
- मुख्य फोकस: रेशम समृद्धि योजना, टसर रेशम विकास, कुटीर उद्योग उत्पादों की ब्रांड बिल्डिंग और ककून उत्पादकों व बुनकरों की आय में वृद्धि करना।

7. स्थानीय निधि संपरीक्षा (Audit): ₹492.45 करोड़
- स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन और ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा के निरंतर संचालन हेतु यह राशि स्वीकृत की गई है। इसके तहत वेतन निर्धारण और पेंशन प्रकरणों का भी निराकरण किया जाएगा।
क्विक समरी टेबल (Quick Summary Table)
| विभाग / परियोजना | स्वीकृत राशि (करोड़ रुपये में) | मुख्य उद्देश्य |
| इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट | ₹19,472.29 | अतिरिक्त वित्त पोषण और पुनरीक्षित लागत |
| प्रोजेक्ट टाइगर एवं विस्थापन | ₹2,381.15 | 94 गांवों का पुनर्वास और वन्यजीव सुरक्षा |
| जनजातीय कार्य विभाग | ₹687.00 | 22 जिलों में शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाएं |
| रेशम उत्पादन योजना | ₹639.25 | स्थानीय रोजगार और बुनकरों की आय बढ़ाना |
| श्रमिक कल्याण | ₹531.78 | श्रम कानून क्रियान्वयन और हाइजीन लैब आधुनिकीकरण |
| स्थानीय निधि संपरीक्षा | ₹492.45 | वित्तीय प्रबंधन और स्थानीय निकायों का ऑडिट |





