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ढाका (बांग्लादेश)। बांग्लादेश में एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ कट्टरपंथियों की मनमानी को लेकर माहौल बेहद गर्मा गया है। राजधानी ढाका में शुक्रवार रात को हजारों हिंदुओं ने सड़कों पर उतरकर एक विशाल और ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया। उत्तरी बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा निर्माण के एक भव्य प्रोजेक्ट को कट्टरपंथियों द्वारा जबरन रुकवाए जाने और भगवान राम की तस्वीर को अपवित्र किए जाने से गुस्साए हिंदू समाज के लोगों ने हाथों में जलती हुई मशालें लेकर मार्च निकाला।
🪔 शाहबाग से प्रेस क्लब तक गूंजे ‘जय श्री राम’ के नारे
यह विशाल मशाल मार्च ढाका के प्रसिद्ध शाहबाग इलाके से शुरू हुआ और गंतव्य स्थल नेशनल प्रेस क्लब तक पहुंचा। पूरे रास्ते प्रदर्शनकारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। इस शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक मार्च में देश के अलग-अलग हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि, आम नागरिक और बड़ी संख्या में हिंदू छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
- क्या है आरोप? प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि उत्तरी बांग्लादेश के गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके में चल रही एक मंदिर परियोजना के दौरान कट्टरपंथियों ने भगवान राम की तस्वीर को अपवित्र किया, उसका अपमान किया और निर्माण कार्य को जबरन रुकवा दिया।
- कार्रवाई में ढिलाई: हिंदू संगठनों का कहना है कि इस घटना को लेकर स्थानीय थाने में मामला दर्ज कराया जा चुका है, लेकिन प्रशासन की ढिलाई के कारण अब तक एक भी दोषी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं, रंगपुर इलाके में हुए एक अन्य छोटे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प होने की भी खबर है।
🏗️ ₹16.9 करोड़ का था प्रोजेक्ट; बननी थी राम, कृष्ण और शिव की प्रतिमाएं
जिस प्रोजेक्ट को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, वह बेहद भव्य और ऐतिहासिक है:
- प्रोजेक्ट का विवरण: गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी में स्थित श्री श्री राधा गोविंद मंदिर परिसर में 81 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण चल रहा था। इसके साथ ही परिसर में 53 फुट की भगवान कृष्ण और 30 फुट की भगवान शिव की प्रतिमाएं भी बनाई जानी थीं।
- बजट और फंडिंग: इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (लगभग 16.9 करोड़ भारतीय रुपए) है। इसका निर्माण कार्य साल 2025 की शुरुआत में पूरी तरह से निजी फंडिंग (Private Funding) के जरिए शुरू किया गया था।
- कट्टरपंथियों की धमकी: मंदिर समिति के मुताबिक, काम शुरू होने के बाद से ही कुछ कथित इस्लामिक कट्टरपंथी समूहों ने लगातार धमकियां देनी शुरू कर दीं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा कारणों को देखते हुए निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।

⏳ सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कट्टरपंथियों की इस हरकत के खिलाफ अब बांग्लादेश के हिंदू संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है:
- अल्टीमेटम: हिंदू संगठनों ने अंतरिम सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि अगर दोषियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
- धार्मिक मंत्रालय को ज्ञापन: शनिवार को संगठनों द्वारा इस संबंध में देश के धार्मिक मामलों के मंत्रालय को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय भी मांगा जा रहा है।
- देशव्यापी अभियान: इसके साथ ही हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में राम मंदिर निर्माण अभियान और रैलियां शुरू करने की घोषणा की है।
🕵️ कट्टरपंथियों की मांग: फंडिंग और बैंक खातों की हो खुफिया जांच
दूसरी तरफ, बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन इमाम-उलमा परिषद और अन्य सहयोगी संगठनों ने इस भव्य प्रोजेक्ट पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। चटगांव में प्रदर्शन करते हुए कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट की फंडिंग के पीछे किसी विदेशी सरकार या संगठन (परोक्ष रूप से भारत की ओर इशारा) का हाथ है। उन्होंने मांग की है कि खुफिया एजेंसियां इस निर्माण से जुड़े लोगों के बैंक खातों और संपत्तियों की जांच करें, क्योंकि यह प्रोजेक्ट बांग्लादेश की संप्रभुता के खिलाफ है।

📌 पिछले 2 वर्षों में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों का खौफनाक आंकड़ा
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले लगातार बढ़े हैं। ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ के अनुसार, जमीन पर हालात बेहद चिंताजनक हैं:
| समयावधि / वर्ष | अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) पर हुए कुल हमले व घटनाएं |
| 4 से 20 अगस्त 2024 (सरकार गिरने के बाद) | 2,010 घटनाएं (घर, दुकान, मंदिर तोड़फोड़ और लूटपाट) |
| वर्ष 2025 | 522 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं |
| वर्ष 2026 (पहले 3 महीने) | 133 नई घटनाएं सामने आईं |
| कुल मिलाकर पिछले 2 साल का दर्द | 2,839 से ज्यादा हमले और 100 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। |
पहले भी रोके गए आस्था के प्रोजेक्ट्स: यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले साल 2025 में कट्टरपंथियों के भारी विरोध के कारण ढाका में निर्माणाधीन दुर्गा मंदिर के प्रशासन को अपनी संरचना खुद गिरानी पड़ी थी। वहीं, साल 2024 में ढाका के उत्तरा इलाके में दुर्गा पूजा के दौरान मूर्ति स्थापना पर आपत्ति जताए जाने के बाद हिंदुओं को मजबूरन पूजा का स्थान बदलना पड़ा था।
Source: ढाका ब्यूरो / अंतर्राष्ट्रीय डेस्क समाचार (20 जून 2026)




