हेल्थ बुलेटिन: मानसून में ‘चिकनगुनिया-डेंगू’ का डबल अटैक; भारत में कैंसर की नई थेरेपी को मंजूरी और मोबाइल स्क्रीन से बच्चों में बढ़ता ‘मायोपिया’

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drnewsindia.com

Health News India (05 July 2026): बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही जहाँ एक तरफ गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ देश के कई राज्यों में मौसमी और संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। इसके अलावा मेडिकल साइंस की दुनिया से भी कुछ बड़ी और राहत भरी खबरें सामने आई हैं।

आइए डालते हैं इस हफ्ते की देश-दुनिया की मुख्य स्वास्थ्य खबरों पर एक नजर:

📌 हेल्थ जगत की बड़ी सुर्खियां (Key Highlights)

  • 🦟 मानसून अलर्ट: दिल्ली, यूपी और मध्य प्रदेश में चिकनगुनिया और डेंगू के मामलों में 25% की बढ़ोतरी।
  • 🔬 मेडिकल साइंस: भारत सरकार ने देश में ही विकसित ‘कैंसर इम्यूनोथेरेपी’ के क्लीनिकल ट्रायल के अगले चरण को मंजूरी दी।
  • 👁️ चाइल्ड हेल्थ: लगातार मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों में ‘मायोपिया’ (निकट दृष्टि दोष) का खतरा दोगुना हुआ (WHO रिपोर्ट)।
  • 💊 फार्मा अपडेट: नकली दवाओं की पहचान के लिए सरकार ने 300 प्रसिद्ध कफ सिरप और एंटीबायोटिक्स पर QR कोड अनिवार्य किया।

🚨 1. मानसून का कहर: जलभराव के बीच बढ़े डेंगू और चिकनगुनिया के मामले

देश के कई राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) में भारी बारिश के बाद हुए जलभराव के कारण मच्छरों से पनपने वाली बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है।

  • लक्षण: डॉक्टरों के मुताबिक, इस बार मरीजों में तेज बुखार के साथ जोड़ों में अत्यधिक दर्द (Joint Pain) और शरीर पर लाल चकत्ते (Rashes) देखे जा रहे हैं।
  • सलाह: स्वास्थ्य मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंट का उपयोग करने की अपील की है।

🔬 2. भारत में ‘मेड-इन-इंडिया’ कैंसर थेरेपी को मिली हरी झंडी

कैंसर के इलाज को लेकर भारत के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर है। भारतीय दवा महानियंत्रक (DCGI) ने स्वदेशी रूप से विकसित CAR-T सेल थेरेपी के उन्नत परीक्षणों को मंजूरी दे दी है। यह थेरेपी मरीज के शरीर की अपनी इम्यून सेल्स (रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं) को री-प्रोग्राम करके कैंसर ट्यूमर को नष्ट करती है। इस स्वदेशी थेरेपी के आने से भविष्य में कैंसर का इलाज वर्तमान के मुकाबले करीब 10 गुना तक सस्ता होने की उम्मीद है।

📱 3. WHO की चेतावनी: स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में महामारी बन रहा ‘मायोपिया’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 6 से 14 वर्ष के बच्चों में मायोपिया (दूर की वस्तुएं धुंधली दिखना) की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

मुख्य कारण: दिन में 3 घंटे से ज्यादा मोबाइल, टैबलेट या टीवी स्क्रीन के सामने बिताना और आउटडोर एक्टिविटीज (बाहरी खेल-कूद) में कमी आना है। डॉक्टरों ने पैरेंट्स को सलाह दी है कि वे ’20-20-20′ रूल अपनाएं (हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें)।

💊 4. नकली दवाओं पर सर्जिकल स्ट्राइक: 300 दवाओं पर QR कोड लागू

बाजार में बिकने वाली नकली और घटिया दवाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब देश की शीर्ष 300 जीवनरक्षक दवाओं, एंटीबायोटिक्स और कफ सिरप के पत्तों (Strips) पर यूनिक क्यूआर कोड (QR Code) प्रिंट करना अनिवार्य हो गया है। ग्राहक स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन करके दवा के असली होने, उसके फॉर्मूले, मैन्युफैक्चरिंग डेट और कंपनी की पूरी प्रामाणिकता की जांच मौके पर ही कर सकेंगे।

🥦 5. न्यूट्रिशन कॉर्नर: मानसून में भूलकर भी न खाएं कच्चा सलाद और कटी सब्जियां

डाइटिशियंस और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बारिश के इस मौसम में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने को कहा है।

  • बचे हरी पत्तेदार सब्जियों से: इस मौसम में पत्तागोभी, पालक और कटी हुई खुली सब्जियों में बैक्टीरिया और कीड़े (लार्वा) पनपने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
  • क्या करें: सब्जियों को हमेशा गुनगुने नमक के पानी से धोकर और अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। इस मौसम में कच्चे सलाद (Raw Salad) के बजाय उबली हुई या स्टीम की हुई सब्जियां सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षित हैं।

स्रोत: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन।

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