सीहोर जिले में मानसून मेहरबान: 24 घंटे में डेढ़ इंच से ज्यादा बारिश; आष्टा-जावर में सबसे तेज बौछारें, सीजन का कुल आंकड़ा 12.68 इंच पार

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Sehore Weather Desk (07 July 2026): सीहोर जिले में मानसून पूरी तरह से सक्रिय बना हुआ है। जिला भू-अभिलेख शाखा (Land Records Department) से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जिले में औसतन 1.57 इंच (39.88 मिमी) बारिश दर्ज की गई है।

इस झमाझम बारिश के साथ ही, 1 जून से लेकर अब तक जिले में कुल औसत वर्षा का आंकड़ा 12.68 इंच (322.0 मिमी) तक पहुंच गया है। लगातार हो रही इस बारिश से जिले के किसानों के चेहरे खिल गए हैं और खरीफ की फसलों (सोयाबीन, मक्का आदि) को इससे जबरदस्त लाभ मिलने की उम्मीद है।

📌 सीहोर मानसून की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • ⛈️ 24 घंटे की टॉप-3: जिले में सबसे ज्यादा बारिश जावर ($2.72$ इंच), आष्टा ($2.28$ इंच) और रेहटी ($2.14$ इंच) में दर्ज की गई।
  • 🌾 आष्टा नंबर वन: इस सीजन में अब तक सबसे ज्यादा कुल 18.03 इंच बारिश अकेले आष्टा ब्लॉक में हो चुकी है।
  • 📊 पिछले साल से बेहतर: गत वर्ष आज के दिन तक जिले में कुल 293.5 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस साल अब तक 322.0 मिमी पानी बरस चुका है।

📊 आपके ब्लॉक का क्या है हाल? देखें सीहोर जिले की बारिश तालिका

जिले के सभी प्रमुख क्षेत्रों में पिछले 24 घंटे में हुई बारिश और इस सीजन के अब तक के कुल आंकड़े नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देख सकते हैं:

क्षेत्र/ब्लॉक (Region)पिछले 24 घंटे की बारिशइस सीजन की कुल बारिश (1 जून से अब तक)
आष्टा (Ashta)🌧️ 2.28 इंच (57.91 मिमी)🚀 18.03 इंच (457.96 मिमी) – जिले में सर्वाधिक
जावर (Jawar)🌧️ 2.72 इंच (69.08 मिमी)📈 15.46 इंच (392.68 मिमी)
भैरूंदा (Bhairunda)🌧️ 0.59 इंच (14.98 मिमी)📈 15.04 इंच (382.01 मिमी)
इछावर (Ichhawar)🌧️ 0.98 इंच (24.89 मिमी)📈 13.54 इंच (343.91 मिमी)
रेहटी (Rehti)🌧️ 2.14 इंच (54.35 मिमी)📈 11.36 इंच (288.54 मिमी)
सीहोर मुख्यालय🌧️ 1.74 इंच (44.19 मिमी)📈 10.81 इंच (274.57 मिमी)
बुधनी (Budhni)🌧️ 1.38 इंच (35.05 मिमी)📈 9.76 इंच (247.90 मिमी)
श्यामपुर (Shyampur)🌧️ 0.75 इंच (19.05 मिमी)📈 7.39 इंच (187.70 मिमी)

🚜 किसानों के लिए अमृत बनी बारिश, फसलों को मिला जीवनदान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में हो रही यह बारिश सोयाबीन की बोनी कर चुके किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। खेतों में पर्याप्त नमी आने से पौधों का अंकुरण (Germination) बेहतर होगा। हालांकि, निचले इलाकों के खेतों में पानी भराने की स्थिति में जल निकासी (Water Drainage) की व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है।

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