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Sehore Local Impact (08 July 2026): सीहोर जिले में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (MP Discom) की कथित लापरवाही और अनदेखी को लेकर अन्नदाताओं और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। बिलकिसगंज-चंदेरी मुख्य मार्ग सहित आस-पास के कई ग्रामीण इलाकों में 11 केवी (11 KV) हाईटेंशन लाइन के खंभे खतरनाक तरीके से झुक गए हैं और मौत बनकर दौड़ रहे बिजली के तार जमीन के बेहद करीब झूल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों और रास्तों के ऊपर लटकते ये तार कभी भी किसी बड़े और आत्मघाती हादसे का कारण बन सकते हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के किसान लगातार आला अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बिजली कंपनी कुंभकर्णी नींद सोई हुई है।
📌 इस सुलगते मुद्दे की मुख्य बातें (Key Highlights)
- ⚡ जमीन छूती मौत: बिलकिसगंज-चंदेरी मार्ग और खेतों में खतरनाक तरीके से झूल रहे हैं 11 केवी हाईटेंशन लाइन के तार।
- 🚑 हादसों का सफर: पिछले साल एक किसान गंभीर रूप से झुलसा था, वहीं इस साल किसान सतीश मेवाड़ा करंट की चपेट में आए, जिनका इलाज फिलहाल भोपाल के अस्पताल में जारी है।
- 📜 दो बार ज्ञापन: किसान नेता एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों गांवों के किसान कलेक्टर को दो बार ज्ञापन सौंप चुके हैं।
- 🛑 अधिकारियों की मनमानी: ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के अफसर मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर के निर्देशों को भी ठेंगे पर रख रहे हैं।

🚨 करंट की चपेट में आ रहे किसान, भोपाल में चल रहा है इलाज
ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों का आरोप है कि विद्युत विभाग की इस आपराधिक लापरवाही के कारण क्षेत्र में पहले भी कई हृदयविदारक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बीते वर्ष करंट लगने से एक स्थानीय किसान गंभीर रूप से घायल हो गया था। वहीं, इस वर्ष भी लापरवाही का शिकार होकर किसान सतीश मेवाड़ा हाईटेंशन लाइन के करंट की चपेट में आ गए। वे इस समय भोपाल के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन लगातार हो रहे हादसों के बावजूद विभाग द्वारा कोई स्थायी समाधान न किए जाने से किसानों में भारी आक्रोश है।
✊ किसानों ने खोला मोर्चा; कलेक्टर से लेकर प्रभारी मंत्री तक गुहार बेअसर
इस जानलेवा समस्या के खिलाफ अब किसानों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। किसान एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है:
प्रदर्शनकारियों का बयान: “हम अपनी और अपने बच्चों की जान की भीख मांगने के लिए दो बार जिला कलेक्टर को आधिकारिक ज्ञापन सौंप चुके हैं। विडंबना देखिए कि सीहोर के बिजली अफसर सूबे के मुख्यमंत्री कार्यालय और जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर तक के कड़े निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। अफसरों की यह तानाशाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
🛠️ प्रशासन को अंतिम चेतावनी: खंभे बदलो, नहीं तो होगा चक्काजाम
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने जिला प्रशासन और बिजली कंपनी को दोटूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है:
- तत्काल हो सुधार: बिलकिसगंज-चंदेरी मार्ग सहित पूरे सीहोर जिले के ग्रामीण अंचलों में जितने भी झुके हुए खंभे और झूलते तार हैं, उन्हें युद्धस्तर पर तुरंत दुरुस्त या बदला जाए।
- उग्र आंदोलन की दी चेतावनी: यदि अगले कुछ दिनों के भीतर इस जानलेवा समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्र के हजारों किसान सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और विद्युत मंडल की होगी।

📞 बिजली विभाग का रटा-रटाया पक्ष
इस पूरे गंभीर विवाद और आक्रोश पर जब बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों से बात की गई, तो उनका हमेशा की तरह एक रटा-रटाया और औपचारिक जवाब सामने आया। विभाग के प्रवक्ताओं का दावा है कि: “ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लाइनों और खंभों के रखरखाव (Maintenance) का कार्य समय-समय पर शेड्यूल के अनुसार किया जाता है। जहां भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां आवश्यकतानुसार मरम्मत और सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी है।”
बहरहाल, विभाग के इन दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। किसानों की इस खुली चेतावनी के बाद अब देखना होगा कि सीहोर जिला प्रशासन और बिजली कंपनी के कान पर जूं रेंगती है या फिर विभाग किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
स्रोतः बिलकिसगंज-चंदेरी क्षेत्र के पीड़ित किसानों द्वारा कलेक्टर कार्यालय में सौंपे गए ज्ञापन की प्रति एवं स्थानीय किसान संघर्ष समिति, सीहोर।




