क्रिसिल की RRR रिपोर्ट: आम आदमी की रसोई पर महंगाई की मार; जून में 5% महंगी हुई वेज थाली, चिकन के दाम बढ़ने से नॉन-वेज थाली भी 6% उछली

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drnewsindia.com

Economy & Business Desk (08 July 2026): देश में आम आदमी की रसोई और रोजाना के खाने का बजट लगातार बिगड़ता जा रहा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने अपनी जून महीने की ‘राइस रोटी रेट’ (RRR) रिपोर्ट जारी कर दी है। इसके अनुसार, घर पर तैयार होने वाली वेज थाली की एवरेज कीमत सालाना आधार पर 5% बढ़कर 28.4 रुपये हो गई है, जो पिछले साल (जून-2025) में 28.1 रुपये थी।

क्रिसिल की मंथली रिपोर्ट के मुताबिक, जून में टमाटर, प्याज, खाने का तेल और रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतें बढ़ने से थाली का बजट ऊपर गया है। महंगाई का आलम यह है कि बाजार में आलू की कीमतों में आई गिरावट का फायदा भी इस वजह से खत्म हो गया। वहीं, भीषण गर्मी और कम सप्लाई के कारण नॉन-वेज थाली की कीमत में भी सालाना 6% का उछाल दर्ज किया गया है।

📌 क्रिसिल RRR रिपोर्ट की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 📈 वेज थाली के दाम: सालाना आधार पर 5% और मासिक आधार पर (मई के मुकाबले) 4% बढ़े।
  • 🍗 नॉन-वेज थाली: सालाना आधार पर 6% और मासिक आधार पर 3% की बढ़ोतरी दर्ज।
  • 🍅 टमाटर में आग: टमाटर पिछले साल के मुकाबले 31% महंगा होकर ₹42 किलो के पार पहुंचा।
  • 🌍 ग्लोबल संकट का असर: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव के चलते खाने का तेल और LPG सिलेंडर 10-10% महंगे हुए।

📊 महीने-दर-महीने (Month-on-Month) कितनी बढ़ी थाली की लागत?

अगर हम सिर्फ मई 2026 के मुकाबले जून 2026 के आंकड़ों को देखें, तो महज एक महीने में ही सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए:

खाद्य सामग्री (Items)एक महीने में बढ़े दाम (%)थाली पर असर (Impact)
🍅 टमाटर (Tomato)🚀 17% की भारी बढ़तगर्मी के कारण फसल की बुआई में देरी और कम आवक से दाम बढ़े।
🧅 प्याज (Onion)📈 8% की तेजीरबी स्टॉक की कम सप्लाई के कारण कीमतें मजबूत हुईं।
🥔 आलू (Potato)📈 5% की बढ़तमासिक आधार पर सुधार, हालांकि सालाना आधार पर 14% सस्ता है।
🍗 ब्रॉयलर (चिकन)📈 2% का अनुमानित उछालभीषण गर्मी से पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ने से सप्लाई चेन टूटी।

🌍 मिडिल ईस्ट संकट से रसोई गैस और खाद्य तेल 10% महंगे

क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशन शर्मा के मुताबिक, इस महंगाई के पीछे केवल घरेलू कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं:

डायरेक्टर पुशन शर्मा का बयान: “मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग (War) के कारण वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके सीधे असर से घरेलू बाजार में खाने का तेल और एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतें सालाना आधार पर 10-10% बढ़ गई हैं। यही वजह है कि वेज और नॉन-वेज दोनों थालियों के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।”

☀️ गर्मी की मार: पोल्ट्री फार्म्स खाली, 7% महंगा हुआ चिकन

नॉन-वेज थाली की कुल लागत में अकेले ब्रॉयलर (चिकन) का हिस्सा करीब 50% होता है। जून महीने में उत्तर और मध्य भारत में पड़ी भीषण गर्मी के चलते पोल्ट्री फार्म्स में पक्षियों की मृत्यु दर (Mortality Rate) काफी बढ़ गई, जिससे उनका वजन कम हुआ। नुकसान के डर से फार्म संचालकों ने नए चूजों को रखने में रुचि नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि बाजार में ब्रॉयलर की सप्लाई घट गई और इसके दाम सालाना आधार पर 7% तक बढ़ गए

🌧️ मौसम की बेरुखी: आगे दालें, प्याज और टमाटर और सताएंगे!

क्रिसिल की रिपोर्ट में आने वाले दिनों को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है:

  • दालों में तेजी की आशंका: मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की मार के कारण दलहन की फसलों को नुकसान पहुंचा है। उड़द और मूंग का पुराना स्टॉक पहले से ही कम है, जिससे आगे दालें और महंगी हो सकती हैं।
  • अगस्त तक टमाटर के दाम रहेंगे ऊंचे: मानसून के दौरान प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में लगातार बारिश की कमी या परिवहन (Logistics) में बाधा आने से जुलाई और अगस्त में टमाटर के दाम संवेदनशील बने रहेंगे।

🔮 राहत की उम्मीद (When will it ease?): रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ताओं को इस महंगाई से राहत सितंबर महीने से मिल सकती है। सितंबर में दक्षिण और पश्चिमी भारत से खरीफ फसलों की नई आवक शुरू होने के बाद कीमतों में कमी आएगी, बशर्ते मानसून का वितरण अच्छा रहे और फसलों की सेहत ठीक बनी रहे।

स्रोत: क्रिसिल इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स (CRISIL) – ‘राइस रोटी रेट’ (RRR) मासिक रिपोर्ट, जुलाई 2026।

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