108 संत पंडित दुर्गाप्रसाद के मार्गदर्शन में किया गया चलती प्रतिमाओं का महाभिषेक

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सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी जगदीश मंदिर टाट बाबा परमार क्षत्रिय समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में निकाली जाने वाली रथ यात्रा आस्था और उत्साह के साथ निकाली जाएगी। रथ यात्रा के पूर्व बुधवार को पूर्ण विधि-विधान से 108 संत दुर्गाप्रसाद कटारे के मार्गदर्शन में यज्ञाचार्य पंडित दीपक शास्त्री सहित अन्य विप्रजनों ने आस्था और उत्साह के साथ यहां पर जारी हवन में आहुतियां दी, वहीं जगन्नाथपुरी से लेकर आई चलती प्रतिमाओं का दुध-दही आदि से महाभिषेक किया। गुरुवार को सुबह दस बजे धूमधाम के साथ रथ यात्रा निकाली जाएगी।


इस संबंध में जानकारी देते हुए परमार समाज के तुलसीराम पटेल, सुरेश गब्बर परमार, चल समारोह के अध्यक्ष भंवर लाल परमार, शिव परमार मुरली, जेपी परमार, विष्णु परमार रोलूखेड़ी ने बताया कि भव्य आयोजन को लेकर प्रांतीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद परमार, मंडलोई चंदर सिंह आदि के सहयोग से सुबह मंदिर में भगवान का अभिषेक और पूजा अर्चना के पश्चात रथ यात्रा आरंभ की जाएगी। नगर भ्रमण पर रथ में बलदाऊ भैया, बहन सुभद्रा के साथ जगतपति जगन्नाथ स्वामी को विराजमान किया जाएगा और उसके बाद शहर के छावनी में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाएगा। इस वर्ष रथ को खिचने का इंतजाम किया गया है। भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ सवार होते हैं। सुबह 10 बजे मंदिर परिसर में विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा और उसके पश्चात रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसको लेकर तैयारियां पूर्ण की गई है।


 यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक रथ यात्रा शहर के प्राचीन जगदीश मंदिर, छावनी से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई संजय टाकीज के पास स्थित स्वर्णकार समाज मंदिर पहुंचेगी। लगातार 66 सालों से परमार क्षत्रिय समाज ट्रस्ट के तत्वाधान में निकाली जाने वाली भव्य यात्रा को लेकर समाजजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में उत्साह है। रथ यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली भजन-कीर्तन मंडलियां अपनी मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बनाएंगी। वहीं आकर्षक बैंड-बाजे, ढोल, डीजे एवं धार्मिक झांकियां यात्रा की शोभा बढ़ाएंगी। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया जाएगा तथा पुष्पवर्षा की जाएगी। इस आयोजन की विशेषता यह है कि श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ को अपने हाथों से खींचते हैं। मान्यता है कि भगवान के रथ को खींचने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथ खींचने के लिए उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की तर्ज पर आयोजित होने वाली यह रथ यात्रा सीहोर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जिसका श्रद्धालु पूरे वर्ष इंतजार करते हैं।

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