नई दिल्ली | DRNewsIndia
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की कमी के बीच उनकी तैनाती को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई अस्पतालों में फार्मासिस्टों को दवा वितरण के बजाय खरीद (परचेज) और स्टोर जैसे प्रशासनिक कार्यों में लगाया गया है, जिससे मरीजों को दवा काउंटर पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से खरीद प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य खरीद प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और अनियमितताओं पर रोक लगाना है। इसके बावजूद कई अस्पतालों में पुरानी व्यवस्था जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
खरीद प्रक्रिया को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
स्वास्थ्य विभाग की केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के बाद विशेष स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश जारी किए थे कि खरीद संबंधी कार्य अधिकृत प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से कराए जाएं। हालांकि आरोप है कि कई अस्पतालों में इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर बहस
मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए गए हैं कि कुछ अस्पतालों में अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से एक ही संवेदनशील पदों पर कार्यरत हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ कर्मचारी संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों के तबादले किए जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर नजर
सीवीसी की गाइडलाइन के अनुसार खरीद, टेंडर और स्टोर से जुड़े कार्यों में निर्धारित प्रशासनिक व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए। अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोपों की संबंधित अस्पतालों या स्वास्थ्य विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।





