drnewsindai.com / रांची (झारखंड): झारखंड PSC-SSC की परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर रांची के कचहरी स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। 8 अगस्त 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शनकारी छात्रों को अपना पूर्ण समर्थन देने रांची पहुंचा।
📌 आंदोलन के मुख्य बिंदु
- 17 दिनों से संघर्ष: छात्र पिछले 17 दिनों से लगातार अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
- भूख हड़ताल: स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 छात्र आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठे हैं।
- CJP की एंट्री: कोर कमेटी के सदस्य और नेशनल कोऑर्डिनेटर अक्षय शिंदे तथा मुकेश ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है।

🤝 प्रतिनिधिमंडल का रांची दौरा और पार्टी का स्टैंड
रांची पहुंचने से पहले अक्षय शिंदे और मुकेश ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके से इस आंदोलन की दिशा और रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे छात्रों को हर संभव मदद मुहैया कराएंगे।
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर लिखा:
“सीजेपी झारखंड के छात्रों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है। मुकेश और अक्षय शिंदे के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल विरोध कर रहे छात्रों को हर तरह का समर्थन देगा।”
वहीं, अक्षय शिंदे ने दिल्ली के सफल प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए कहा, “CJP के हमारे ऐसे साथी जिन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी, वे अब यहाँ भी छात्रों का समर्थन कर रहे हैं। हम तब तक यह जगह नहीं छोड़ेंगे, जब तक कि छात्रों की सभी मांगें मान नहीं ली जातीं।”

💻 संस्थापक अभिजीत दीपके का वर्चुअल संबोधन: “हम प्रेशर ग्रुप का काम करेंगे”
आंदोलनकारियों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने CJP की भूमिका को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि CJP इस छात्र आंदोलन को हाईजैक करके इसका ‘राजनीतिक नेतृत्व’ नहीं करेगी, बल्कि एक बाहरी पब्लिक प्रेशर ग्रुप (Public Pressure Group) के रूप में काम करेगी। पार्टी की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों को पूरा लॉजिस्टिकल (संसाधन संबंधी) और नैतिक समर्थन दिया जाएगा।
🔙 आंदोलन की पृष्ठभूमि और CJP का ट्रैक रिकॉर्ड
- स्थानीय स्तर पर शुरुआत: इस आंदोलन की शुरुआत मूल रूप से झारखंड के स्थानीय छात्रों ने ही की थी। CJP, जो पहले से ही शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है, बाद में एक बाहरी समर्थक समूह के तौर पर इस मुहिम से जुड़ी।
- जंतर-मंतर की सफलता का अनुभव: CJP का परीक्षा व्यवस्था को लेकर यह कोई पहला बड़ा कदम नहीं है। इससे पहले जून-जुलाई में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक एक विशाल आंदोलन चला था। इसी ऐतिहासिक प्रदर्शन के दबाव में 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब पार्टी झारखंड में भी उसी तर्ज पर छात्रों को न्याय दिलाने की कोशिश में है।




