drnewsindia.com / स्पोर्ट्स डेस्क | डिजिटल डेस्क: भारत की स्टार महिला युगल जोड़ी त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में इतिहास रचते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम कर लिया है। शनिवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को विश्व की नंबर-1 चीनी जोड़ी लियू शेंग शू और टैन निंग से 18-21, 21-13, 21-8 से हार का सामना करना पड़ा।
1 घंटे 11 मिनट चला कड़ा मुकाबला
भारतीय जोड़ी ने पहला गेम जीतकर शानदार शुरुआत की थी, लेकिन अगले दो गेमों में चीनी जोड़ी ने जबरदस्त वापसी की।
- पहला गेम (21-18): त्रिसा-गायत्री 16-18 से पीछे थीं, लेकिन लगातार 5 अंक जीतकर शानदार वापसी की और पहला गेम अपने नाम किया।
- दूसरा गेम (13-21): ब्रेक तक भारतीय जोड़ी 11-10 से आगे थी, लेकिन इसके बाद चीनी खिलाड़ियों ने संयम दिखाते हुए गेम जीत लिया।
- तीसरा गेम (8-21): निर्णायक गेम में विश्व नंबर-1 जोड़ी ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए मैच अपने नाम किया।

15 साल बाद विमेंस डबल्स में पदक और लगातार 11वां एडिशन
भारत को विश्व चैंपियनशिप की विमेंस डबल्स कैटेगरी में 15 साल बाद कोई मेडल मिला है। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने ब्रॉन्ज जीता था। इसके साथ ही भारत ने 2011 से लगातार 11वें एडिशन में कम से कम एक मेडल जीतने के अपने सिलसिले को बरकरार रखा है।
वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का रिकॉर्ड:
कुल मेडल: 16 (1 गोल्ड, 4 सिल्वर, 11 ब्रॉन्ज)
पहला मेडल: प्रकाश पादुकोण (1983 – ब्रॉन्ज)
एकमात्र गोल्ड: पीवी सिंधु (2019)
मैच के बाद किसने क्या कहा?
- गायत्री गोपीचंद: “पहले गेम की जीत के बाद हम थोड़े ज्यादा कॉन्फिडेंट हो गए थे। दूसरे गेम में चीनी खिलाड़ियों ने काफी धैर्य के साथ खेला, जबकि हम अंक लेने की जल्दबाजी में गलतियां कर बैठे। हालांकि, पोडियम पर जगह बनाकर बेहद खुशी हो रही है।”
- त्रिसा जॉली: “आज हमारा दिन नहीं था। प्रतिद्वंद्वियों ने रिदम हासिल कर लिया और रैलियों में धैर्य रखा जिससे उन्हें फायदा मिला। अप्रैल में टखने की चोट के बाद इस मुकाम तक पहुंचना हमारे लिए यादगार सफर रहा।”
- चीफ कोच पुलेला गोपीचंद: “दोनों ने देश का मान बढ़ाया है। कोर्ट पर मैं एक कोच और बाहर एक पिता के रूप में दोनों पर गर्व महसूस करता हूँ। उन्होंने टूर्नामेंट में टॉप खिलाड़ियों को हराया है।”

Quick Highlights (मुख्य बिंदु)
- उपलब्धि: त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल
- सेमीफाइनल स्कोर: 18-21, 21-13, 21-8 (बनाम लियू शेंग शू और टैन निंग, चीन)
- ऐतिहासिक महत्व: 2011 के बाद विमेंस डबल्स में भारत का पहला पदक
- मैच की अवधि: 1 घंटा 11 मिनट




