drnewsindia.com / नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार दिल्ली-एनसीआर में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज बेचेगी। वर्तमान में दिल्ली में प्याज की औसत खुदरा कीमत ₹55 प्रति किलो चल रही है, जिससे आम जनता को करीब 36% (₹20/किलो) की सीधी राहत मिलेगी।
इस आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को 800 टन प्याज लेकर ‘कांदा एक्सप्रेस’ स्पेशल ट्रेन दिल्ली पहुंचेगी।
🛒 नैफेड, NCCF और केंद्रीय भंडार पर मिलेगी सस्ती प्याज
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि दिल्ली में यह रियायती प्याज नैफेड (Nafed), NCCF और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स व मोबाइल वैन के जरिए बेची जाएगी।
- इन 4 बड़े शहरों में भी रेलवे से पहुंचेगी सप्लाई: सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी में भी रेलवे के जरिए थोक में प्याज भेजी जा रही है।
- नासिक बफर स्टॉक से आपूर्ति: इन प्रमुख शहरों में भेजी जा रही प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे सरकारी बफर स्टॉक से निकाली गई है।

📊 1 महीने में 28% और सालभर में 56% महंगी हुई प्याज
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में प्याज के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया है:
| समयावधि | औसत खुदरा कीमत (₹/किलो) | बढ़ोतरी (%) |
| 25 जुलाई 2026 | ₹34.80 | – |
| 25 अगस्त 2026 | ₹44.72 | +28% |
| 25 अगस्त 2025 (पिछले साल) | ₹28.67 | +56% (वार्षिक) |
थोक बाजार की स्थिति: 25 अगस्त को देश में औसत थोक मूल्य ₹36.73 प्रति किलो दर्ज किया गया, जो पिछले साल की इसी तारीख (₹22.54) से करीब 63% ज्यादा है।
🚆 ‘कांदा एक्सप्रेस’ का बढ़ा दायरा: 16 शहरों तक पहुंचेगा बफर स्टॉक
सरकार ने इस साल प्याज की सप्लाई चेन को तेज करने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ के फेरे काफी बढ़ा दिए हैं:
- वर्ष 2024-25: केवल 14 रेलवे रैक के जरिए 5 शहरों में लगभग 12,000 टन प्याज भेजी गई थी।
- वर्ष 2025-26 (वर्तमान): अब तक 86 रेलवे रैक के जरिए देश के 16 प्रमुख शहरों में करीब 88,000 टन प्याज पहुंचाई जा चुकी है।

📦 1.21 लाख टन बफर स्टॉक मौजूद, घबराने की जरूरत नहीं
उपभोक्ता मंत्रालय के अनुसार देश में प्याज की कोई किल्लत नहीं है:
- बफर स्टॉक: ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ के तहत सरकार के पास फिलहाल 1.21 लाख टन का सुरक्षित बफर स्टॉक मौजूद है।
- कुल उत्पादन: वर्ष 2025-26 में देश का कुल प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल (307.67 लाख टन) के लगभग बराबर ही है।
❓ अगस्त-सितंबर में क्यों महंगी होती है प्याज?
विशेषज्ञों के मुताबिक, हर साल अगस्त और सितंबर महीने में प्याज की कीमतों में मौसमी (Seasonal) तेजी आती है। इसके मुख्य कारण हैं:
- आगामी त्यौहारों के कारण मांग का अचानक बढ़ना।
- मानसून व बारिश के कारण मंडियों तक सप्लाई चेन में रुकावट आना।
- पुरानी रबी फसल के स्टॉक में कमी आना।
इसी ट्रेंड को समय रहते नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार अपना बफर स्टॉक तेजी से बाजारों में उतार रही है।




