इंदौर दूषित पानी त्रासदी: भागीरथपुरा में रक्षाबंधन पर पसरा मातम, सूनी पड़ीं दुकानें और कलाइयां

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drnewsindia.com/ इंदौर

रक्षाबंधन यानी भाई-बहन के अटूट प्यार, मिठास और खुशियों का त्योहार। बाजारों में सजी रंग-बिरंगी राखियां और मिठाइयों की महक इस दिन को खास बनाती है। लेकिन इंदौर के भागीरथपुरा में इस बार रक्षाबंधन का रंग पूरी तरह फीका है।

दूषित पानी की त्रासदी में 36 लोगों की मौत के बाद यह पहला रक्षाबंधन है। क्षेत्र की हर चौथी गली में सन्नाटा और मातम सा माहौल है। जहां हर साल बच्चों की किलकारियां और रिश्तेदारों की आवाजाही रहती थी, वहां आज सिर्फ अपनों की दर्दभरी यादें बची हैं।

मासूम किंजल को अब भी भाई अव्यान का इंतजार

पांच महीने के मासूम अव्यान की जान भी दूषित पानी के कारण चली गई थी। उसकी बहन किंजल के हाथ में आज भी वही राखी है, जो उसने पिछले साल अपने भाई के लिए खरीदी थी। राखी बड़ी होने के कारण वह पिछले साल नहीं बांध पाई थी और उसे संभालकर रख लिया था कि इस बार बांधेगी।

  • मां साधना का दर्द: “बेटे के जाने के बाद ऐसा कोई दिन नहीं बीता जब आंसू न बहे हों। आठ दिन बाद अव्यान छह महीने का होने वाला था और उसका अन्नप्राशन होना था।”
  • न्याय की आस: पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रशासन और दोषियों पर अब तक सख्त कार्रवाई नहीं हुई है, उन्हें अदालत से न्याय की उम्मीद है।

मां के बिना सूने पड़े घर, त्योहार की रौनक खत्म

  • किशोर ध्रुवकर का दर्द: दूषित पानी से जान गंवाने वाली गीताबाई के बेटे किशोर बताते हैं कि मां के रहने पर बहन और बुआ सभी आती थीं, घर में मिठाई बनती थी। अब मां नहीं हैं तो बहन भी नहीं आई और उन्हें खुद खाना बनाना पड़ रहा है।
  • रोहित रावत की आपबीती: गौमती रावत के बेटे रोहित बताते हैं कि मां के जाने के बाद पूरे घर में खालीपन आ गया है। तीन भाइयों और एक बहन का यह परिवार इस बार केवल नाममात्र का त्योहार मना रहा है।
  • पानी की समस्या बरकरार: स्थानीय निवासियों के अनुसार, इलाके के पानी में अभी भी कई बार बदबू आती है और लोग फिटकरी डालकर पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

बाजारों पर भी दिखा त्रासदी का असर

भागीरथपुरा के स्थानीय बाजारों में त्योहार के बावजूद सन्नाटा पसरा हुआ है:

  • राखी विक्रेता विकास: “पिछले सालों में रक्षाबंधन से पहले बाजार में भारी भीड़ रहती थी। इस बार दुकानें सजी हैं, लेकिन खरीदार नहीं हैं। जो बहनें हर साल राखी लेने आती थीं, उनमें से कई अब इस दुनिया में नहीं हैं।”
  • व्यापारी सुरेश वर्मा: “बीते 4-5 महीनों में स्थिति बहुत खराब हुई है। सड़कें टूटी हैं और नालियां खुदी पड़ी हैं, जिससे ग्राहकों की आवाजाही और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।”

दूषित पानी की इस त्रासदी ने भागीरथपुरा के कई परिवारों से उनकी खुशियां छीन ली हैं। राखियों की डोर और त्योहार की तारीख वही है, लेकिन कई घरों में अपनों के चले जाने से पैदा हुआ खालीपन कभी नहीं भर पाएगा।

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