drnewsindia.com / बिश्केक/नई दिल्ली | 31 अगस्त 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच चुके हैं। यात्रा की शुरुआत में पीएम मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत की। पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की ऐतिहासिक 25वीं वर्षगांठ समिट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
- समिट की थीम: “सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना”
- 10 सदस्य देश: भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान।
- द्विपक्षीय बैठकें: पीएम मोदी समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अहम बैठकें करेंगे।
- विशेष कार्यक्रम: पीएम मोदी बिश्केक में आयोजित 6वें ‘वर्ल्ड नोमैड गेम्स’ के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लेंगे।
- अगली अध्यक्षता: किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होने के बाद 2026–27 का कार्यकाल पाकिस्तान को मिलने की संभावना है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है।

भारत के लिए क्यों बेहद खास है यह SCO समिट?
- महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार: मध्य एशिया यूरेनियम, तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) से समृद्ध है। भारत इस क्षेत्र के साथ अपने कूटनीतिक व रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है।
- ऊर्जा सुरक्षा: तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को देखते हुए भारत मध्य एशियाई देशों से दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौते हासिल करना चाहता है।
- नए व्यापारिक मार्ग: भारत कनेक्टिविटी बढ़ाने और नए ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने पर जोर दे रहा है ताकि मध्य एशिया के साथ सीधा व्यापार आसान हो सके।
- आतंकवाद पर कड़ा रुख: अफगानिस्तान के मौजूदा हालात और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत सभी सदस्य देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।
एक नज़र में: क्या है SCO?
- स्थापना: 15 जून 2001 (शंघाई, चीन)
- संस्थापक सदस्य (6): चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान।
- विस्तार: 2017 में भारत और पाकिस्तान पूर्ण सदस्य बने। 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए।
- मुख्य उद्देश्य: क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-विरोधी अभियान, आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक संबंध मजबूत करना।
पिछला संदर्भ: पिछले वर्ष 2025 में जारी तियानजिन घोषणा-पत्र (Tianjin Declaration) में SCO सदस्य देशों ने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की थी और आतंकवाद के प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान किया था।




