drnewsindia.com / आष्टा (सीहोर): गणेशोत्सव के पावन पर्व पर आष्टा के बड़ा बाजार स्थित ऐतिहासिक प्राचीन गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। करीब 200 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा और उसके ठीक नीचे बनी रहस्यमयी गुफा है। इस गुफा में दो बड़े और एक छोटे शिवलिंग के साथ मां अन्नपूर्णा भी विराजमान हैं। गणेश जी और भोलेनाथ के इस अनोखे संगम के दर्शन के लिए दूर-दराज से भक्त यहां पहुंच रहे हैं।
मंदिर की 4 प्रमुख विशेषताएं (Key Highlights)
- 1820 में हुआ निर्माण: लगभग 50 बाय 100 फीट के दायरे में बने इस मंदिर का निर्माण सन् 1820 में हुआ था।
- प्रतिमा के नीचे गुफा: भगवान गणेश की प्रतिमा के ठीक नीचे एक प्राचीन गुफा है, जिसमें तीन शिवलिंग और मां अन्नपूर्णा का स्वरूप है।
- दो बार बदला चोला: इतिहास में मंदिर की गणेश प्रतिमा ने पहली बार 1950 में और दूसरी बार 1985 में चोला बदला है।
- पहले ही दिन महाआरती: अन्य जगहों पर अनंत चतुर्दशी के करीब महाआरती होती है, लेकिन यहां गणेश चतुर्थी के पहले दिन दोपहर 12 बजे घट स्थापना के साथ विशेष महाआरती की परंपरा है।

सात पीढ़ियों से एक ही परिवार कर रहा है सेवा
60 वर्षीय लक्ष्मीबाई बैरागी के अनुसार, उनके परिवार की सात पीढ़ियां लगातार इस मंदिर की निस्वार्थ पूजा-अर्चना और देखरेख करती आ रही हैं।
पूजा की वंश परंपरा:
- गणेशदास जी (प्रथम पुजारी)
- राघोदास जी
- गणेशदास जी
- गोविंददास जी
- द्वारकादास जी
- गोकुलदास जी
- रणछोड़दास जी
वर्तमान में परिवार के नर्मदा बैरागी, विष्णु बैरागी, बालकृष्ण बैरागी और गिरजेश बैरागी मंदिर की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।

प्रतिदिन होता है भव्य श्रृंगार
गणेशोत्सव के 10 दिनों के दौरान प्रतिदिन भगवान गणेश का मनमोहक और आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए सुबह 6 बजे खुलते हैं और रात 11 बजे बंद होते हैं। बड़ा बाजार के अलावा अलीपुर, सब्जी मंडी और कन्नौद रोड स्थित गणेश पंडालों में भी उत्सव का माहौल बना हुआ है।




