drnewsindia.com / भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सितंबर के आखिरी सप्ताह से इसकी विदाई शुरू होने का अनुमान है, लेकिन इससे पहले प्रदेश में तेज बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। शुक्रवार सुबह राजधानी भोपाल के कोलार समेत कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 21 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक, आंधी और बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।
मौसम अपडेट: मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- 4 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: नीमच, रतलाम, झाबुआ और श्योपुर में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच तक बारिश होने का अनुमान।
- 24 घंटे में 47 जिलों में बारिश: सबलगढ़ (मुरैना) में सबसे ज्यादा 4 इंच और ओरछा (निवाड़ी) में ढाई इंच पानी गिरा।
- नया वेदर सिस्टम सक्रिय: अंडमान सागर में 19 सितंबर को नया कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना, जो एमपी में बारिश का नया आधार बनेगा।
- कोटे से 7% कम बारिश: प्रदेश में अब तक 33.1 इंच (88.9%) बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 2.5 इंच कम है।

क्यों हो रही है बारिश? (वेदर सिस्टम)
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, इस समय दो प्रमुख सिस्टम सक्रिय हैं:
- अरब सागर में लो प्रेशर: सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।
- बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम: 19 सितंबर की शाम उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव का क्षेत्र बनने के संकेत हैं, जो पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़कर मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करेगा।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों में सितंबर बारिश के ऐतिहासिक रिकॉर्ड
- भोपाल: सितंबर में औसत बारिश 7 इंच होती है, लेकिन पिछले 5 सालों से कोटे से अधिक बारिश हो रही है। (24 घंटे का ऑल-टाइम रिकॉर्ड: 9.2 इंच – 2 सितंबर 1947)।
- इंदौर: इंदौर में सितंबर महीने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड 30 इंच (वर्ष 1954) बारिश का है।
- ग्वालियर: ग्वालियर में अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। सितंबर का ऑल-टाइम रिकॉर्ड 25.5 इंच (वर्ष 1990) है।
- जबलपुर: जबलपुर में 20 सितंबर 1926 को 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड 8.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
- उज्जैन: वर्ष 1961 के सितंबर महीने में उज्जैन में रिकॉर्ड 43 इंच (1089 मिमी) बारिश हुई थी, जिसने पूरे सीजन का कोटा भर दिया था।




