Polyhouse Farming: कम जमीन में खेती का बड़ा मॉडल, सरकार से मिल सकती है 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी, जानें पूरी जानकारी

0
7

भारत में खेती लंबे समय से मौसम पर काफी हद तक निर्भर रही है। बारिश, तापमान में बदलाव, ओलावृष्टि, तेज गर्मी और अन्य मौसमी परिस्थितियां कई बार किसानों की फसल और आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, सिंचाई और कृषि उपकरणों की बढ़ती लागत ने खेती को पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे माहौल में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसी तकनीकों की ओर भी देख रहे हैं, जिनसे सीमित क्षेत्र में बेहतर उत्पादन और अधिक व्यवस्थित तरीके से खेती की जा सके।

क्या है पॉलीहाउस खेती?

पॉलीहाउस एक तरह की संरक्षित कृषि संरचना है, जिसे आमतौर पर पारदर्शी या अर्ध-पारदर्शी प्लास्टिक कवर से तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य फसल को प्रतिकूल बाहरी परिस्थितियों से बचाते हुए उसके लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना होता है। खेती के आकार और तकनीक के आधार पर इसमें वेंटिलेशन, ड्रिप इरिगेशन, फर्टिगेशन, फॉगिंग और अन्य व्यवस्थाएं लगाई जा सकती हैं।

खुले खेत की तुलना में पॉलीहाउस में किसान फसल के वातावरण और उत्पादन प्रक्रिया पर ज्यादा नियंत्रण रख सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर पॉलीहाउस परियोजना में निश्चित रूप से अधिक मुनाफा होगा। उत्पादन और आमदनी फसल, तकनीक, बाजार मूल्य, लागत और प्रबंधन समेत कई कारकों पर निर्भर करती है।

सरकार क्यों दे रही है आर्थिक सहायता?

पॉलीहाउस और दूसरी संरक्षित खेती तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) जैसी योजनाओं में प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा National Horticulture Board (NHB) के माध्यम से भी बागवानी और संरक्षित परिस्थितियों में व्यावसायिक उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

इन योजनाओं का उद्देश्य आधुनिक बागवानी तकनीकों को बढ़ावा देना, उत्पादन की गुणवत्ता सुधारना और किसानों तथा कृषि उद्यमियों को व्यावसायिक स्तर पर आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी की बात कितनी सही?

पॉलीहाउस खेती के संबंध में अक्सर 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का उल्लेख किया जाता है। यहां किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह रकम हर व्यक्ति को मिलने वाली निश्चित सब्सिडी नहीं है। योजना के नियमों के अनुसार पात्र परियोजनाओं के लिए निर्धारित पात्र लागत पर वित्तीय सहायता का प्रावधान होता है और इसकी अधिकतम सीमा परियोजना तथा लागू दिशानिर्देशों पर निर्भर करती है।

इसलिए किसान को यह नहीं मानना चाहिए कि पॉलीहाउस लगाने पर सीधे उसके खाते में 1 करोड़ रुपये आ जाएंगे। वास्तविक सहायता परियोजना की स्वीकृत लागत, निर्धारित लागत मानकों, पात्रता, योजना की शर्तों और संबंधित विभाग की मंजूरी के आधार पर तय होती है।

बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट के मामले में सब्सिडी की अधिकतम सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन छोटे किसान की वास्तविक पात्रता और सहायता राशि इससे काफी अलग हो सकती है।

पॉलीहाउस खेती आधुनिक कृषि का एक ऐसा मॉडल है जिसमें किसान संरक्षित वातावरण में व्यावसायिक बागवानी कर सकता है। सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता शुरुआती निवेश के बोझ को कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी को अधिकतम सीमा के रूप में समझना चाहिए, न कि हर किसान को मिलने वाली निश्चित रकम के तौर पर।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here