खंडवा में पटवारी पर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप, अपने और पत्नी के नाम दर्ज कराईं 51 जमीनें

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खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से सरकारी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक पटवारी ने अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर बड़ी संख्या में जमीनों के पट्टे अपने और अपनी पत्नी के नाम दर्ज करा लिए। सामने आई जानकारी के अनुसार पटवारी राजेश के नाम 48 और उसकी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम तीन पट्टे दर्ज किए गए। इस तरह कुल 51 जमीनों को कथित तौर पर दोनों के नाम दर्ज कराया गया।

स्वामित्व योजना लागू होने के कुछ दिन बाद मामला आया सामने

मध्य प्रदेश सरकार ने 17 सितंबर को राज्य में ‘स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ लागू की थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र लोगों को उनकी संपत्ति से जुड़े अधिकारों को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराना और मुफ्त रजिस्ट्री का अधिकार देना बताया गया है। योजना के तहत ग्रामीण संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और लोगों को उनके अधिकारों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने पर जोर है।

योजना लागू होने के महज आठ दिन बाद खंडवा जिले से राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया। जिस व्यवस्था में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकारों को सुरक्षित और स्पष्ट बनाने का उद्देश्य है, उसी से जुड़े रिकॉर्ड में पटवारी द्वारा कथित तौर पर हेरफेर किए जाने का आरोप सामने आया है।

पटवारी और पत्नी के नाम दर्ज हुए 51 पट्टे

मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, पटवारी राजेश ने कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव करते हुए 48 पट्टे अपने नाम दर्ज करा लिए। इसके अलावा तीन पट्टे उसकी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम दर्ज किए गए। इस तरह कुल 51 जमीनें दोनों के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि आरोप उस अधिकारी से जुड़ा है, जिसकी जिम्मेदारियों में भूमि और राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित काम शामिल होता है। राजस्व व्यवस्था में जमीन के रिकॉर्ड का महत्व काफी अधिक होता है, क्योंकि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भूमि के स्वामित्व, कब्जे और अन्य अधिकारों से जुड़े मामलों की जानकारी सामने आती है।

कैसे खुला मामला?

मामले की पोल सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। जांच में सरकारी रिकॉर्ड में जमीनों के नामांतरण या पट्टों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। जिला कलेक्टर ने पटवारी को निलंबित कर दिया है।

हालांकि पूरे मामले में रिकॉर्ड में किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के माध्यम से बदलाव किए गए, यह जांच का विषय है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिन 51 जमीनों का उल्लेख सामने आया है, उनके मूल रिकॉर्ड में किसका नाम दर्ज था और बाद में उनमें किस तरह परिवर्तन किए गए। इसके अलावा यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है कि कथित तौर पर किए गए बदलावों में किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका थी या नहीं।

फिलहाल जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद मामले की जांच पर नजर बनी हुई है। 51 जमीनों को अपने और पत्नी के नाम दर्ज कराने के आरोप, सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों से जुड़े दावों और रिकॉर्ड में कथित बदलाव की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ यह भी महत्वपूर्ण रहेगा कि जिन जमीनों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी हुई है, उनकी वास्तविक स्थिति क्या निकलती है और प्रभावित संपत्तियों के अधिकारों को किस तरह सुरक्षित किया जाता है।

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