मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में जिला पंचायत उपचुनाव के दौरान सड़क निर्माण का मुद्दा ग्रामीणों के विरोध का कारण बन गया। जिला पंचायत उपचुनाव के वार्ड क्रमांक-3 के अंतर्गत आने वाले ग्राम मऊ पथरई में ग्रामीणों ने सड़क की बदहाल स्थिति से नाराज होकर मतदान का बहिष्कार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क लंबे समय से खराब है और बार-बार समस्या उठाए जाने के बावजूद सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान नहीं करने का फैसला लिया।
मतदान केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
मऊ पथरई में मतदान के लिए केंद्र क्रमांक 144 और 145 बनाए गए थे। ग्रामीणों के बहिष्कार के कारण मतदान शुरू होने के बाद इन केंद्रों पर अपेक्षाकृत सन्नाटा देखने को मिला। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मतदान प्रक्रिया में शामिल न होने का निर्णय लिया। इसके चलते शुरुआती समय में पोलिंग बूथों पर केवल गिनती के वोट ही डाले जा सके।
ग्रामीणों का यह कदम स्थानीय स्तर पर सड़क और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों की ओर ध्यान खींचने की कोशिश के तौर पर सामने आया। ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि उनके लिए सड़क निर्माण का मुद्दा महत्वपूर्ण है और जब तक उनकी समस्या पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने को लेकर असंतुष्ट हैं।
‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ के नारों से जताया विरोध
मतदान बहिष्कार के दौरान ग्रामीणों ने ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ के नारे लगाए। यह नारा उनकी मुख्य मांग को स्पष्ट करता नजर आया। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान मतदाताओं की ओर रहता है, लेकिन गांव की मूलभूत समस्या को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
मतदान का बहिष्कार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति ग्रामीणों की नाराजगी जताने का एक तरीका रहा। हालांकि, इस तरह के बहिष्कार से चुनाव में मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ सकता है। मऊ पथरई में मतदान केंद्र क्रमांक 144 और 145 पर ग्रामीणों के इस फैसले का असर शुरुआती मतदान प्रक्रिया में दिखाई दिया, जहां बहुत कम संख्या में वोट पड़े।



