UP में कांग्रेस कैसे आगे बढ़ेगी? नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने बताया 2027 चुनाव का प्लान

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने प्रतापगढ़ के रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। उन्होंने अजय राय की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। उनके साथ सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी को विधायक दल का नेता बनाया गया है।

403 विधानसभा सीटों पर संगठन मजबूत करने की तैयारी

आराधना मिश्रा के अनुसार चुनाव में केवल गठबंधन या बड़े नेताओं के प्रचार से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी संगठन को मजबूत करना जरूरी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनकी प्राथमिकताओं में बूथ स्तर तक पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क और संगठन की स्थिति का आकलन शामिल है। पार्टी सभी विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार करने पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत है, कहां कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जरूरत है और किन सीटों पर पार्टी को अपना आधार बढ़ाना होगा।

आराधना मिश्रा ने यह भी संकेत दिया है कि उम्मीदवारों के चयन में जीतने की क्षमता को महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। हालांकि सीटों और उम्मीदवारों को लेकर अंतिम फैसला कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। ऐसे में प्रदेश संगठन की भूमिका स्थानीय स्तर पर संभावित उम्मीदवारों, कार्यकर्ताओं और चुनावी समीकरणों की जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

सपा के साथ गठबंधन पर क्या है कांग्रेस का रुख?

2027 के चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों में से एक है। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश में साथ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी 33 सीटों पर रही थी। कांग्रेस ने जिन 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से छह पर जीत दर्ज की थी।

आराधना मिश्रा ने संकेत दिया है कि कांग्रेस गठबंधन को लेकर सकारात्मक है और पार्टी के लिए गठबंधन धर्म निभाना प्राथमिकता में है। हालांकि विधानसभा चुनाव के लिए सीटों का अंतिम बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा है कि सीटों की संख्या और गठबंधन से जुड़े अंतिम निर्णय पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व फैसला करेगा।

रायबरेली और अमेठी को लेकर आराधना मिश्रा का बयान

रायबरेली और अमेठी कांग्रेस तथा गांधी परिवार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहे हैं। आराधना मिश्रा ने इन दोनों क्षेत्रों को गांधी परिवार से विशेष रूप से जुड़ा बताया है। उनका कहना है कि रायबरेली और अमेठी गांधी परिवार के लिए केवल लोकसभा क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि इन क्षेत्रों से परिवार का लंबे समय का राजनीतिक और सामाजिक संबंध रहा है।

2024 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से राहुल गांधी ने जीत दर्ज की थी, जबकि अमेठी से कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने बीजेपी की तत्कालीन सांसद स्मृति ईरानी को हराया था। इन दोनों नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी की राजनीतिक अहमियत एक बार फिर चर्चा में आई।

हालांकि विधानसभा चुनाव का समीकरण लोकसभा चुनाव से अलग होता है। विधानसभा की 403 सीटों पर स्थानीय संगठन, उम्मीदवार, क्षेत्रीय मुद्दे और गठबंधन की रणनीति अलग-अलग भूमिका निभाते हैं। इसलिए कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी के साथ-साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी संगठन को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, आराधना मिश्रा के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, रायबरेली-अमेठी जैसे पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों के साथ दूसरे इलाकों में पार्टी का आधार बढ़ाने और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी है। सीट बंटवारे का अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है। ऐसे में आने वाले महीनों में कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारियों और सपा के साथ सीट-समझौते पर होने वाली बातचीत से 2027 के चुनाव की उसकी रणनीति की दिशा और स्पष्ट होगी।

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