श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब इनके संरक्षण और प्रबंधन की रणनीति भी पार्क की निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीतों की बढ़ती आबादी और उनके संभावित विचरण क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए अब ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य केवल कूनो नेशनल पार्क के भीतर चीतों की निगरानी करना नहीं, बल्कि उनके आसपास के जंगलों और संभावित रूप से दूसरे जिलों तक पहुंचने की स्थिति में भी उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था तैयार करना है।
एनटीसीए और वन विशेषज्ञ दे रहे प्रशिक्षण
इस योजना को तैयार करने के साथ वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसके लिए तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य वन अमले को चीतों की निगरानी, उनके संभावित विचरण क्षेत्र की पहचान और दूसरे वन क्षेत्रों में उनके पहुंचने की स्थिति में प्रबंधन के लिए सक्षम बनाना है।
ग्वालियर-चंबल संभाग के वन क्षेत्रों के लिए यह तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कूनो के आसपास के जंगल आपस में जुड़े हुए हैं और वन्यजीवों की आवाजाही केवल किसी एक संरक्षित क्षेत्र की सीमा तक सीमित नहीं रहती। ऐसे में लैंडस्केप आधारित प्रबंधन वन्यजीवों के लिए उपलब्ध पूरे प्राकृतिक क्षेत्र को समझने में मदद करेगा।
5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा डेटा
‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ की एक महत्वपूर्ण विशेषता 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन तैयार करना है। इन सैंपल जोन में वन क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। प्रत्येक जोन में केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं रहा जाएगा कि वहां चीते मौजूद हैं या नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम से संबंधित विभिन्न प्रकार का डेटा एकत्र किया जाएगा।
इसके तहत क्षेत्र में मौजूद पेड़-पौधों और घास की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा मवेशियों, शाकाहारी वन्यजीवों, मांसाहारी वन्यजीवों और पक्षियों की मौजूदगी को भी रिकॉर्ड किया जाएगा। इस तरह तैयार होने वाला डेटा संबंधित क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति को समझने में मदद करेगा।
किसी वन क्षेत्र में चीतों के लिए उपयुक्त परिस्थितियां हैं या नहीं, इसका आकलन केवल चीते की मौजूदगी से नहीं किया जा सकता। वहां उपलब्ध भोजन, वनस्पति, दूसरे वन्यजीवों की संख्या और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से सैंपल जोन में व्यापक स्तर पर डेटा जुटाने की योजना बनाई गई है।
पूरे इकोसिस्टम की स्थिति समझना होगा जरूरी
योजना में पेड़-पौधों, घास, पक्षियों और विभिन्न वन्यजीवों का डेटा जुटाने का प्रावधान यह दर्शाता है कि चीता संरक्षण को व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। किसी भी बड़े मांसाहारी वन्यजीव के लिए केवल सुरक्षित जंगल ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके लिए पर्याप्त शिकार आधार और उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण भी आवश्यक होता है।
5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में अलग-अलग श्रेणियों का डेटा जुटाने से वन विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन से क्षेत्र चीतों के लिए अधिक अनुकूल हो सकते हैं और किन क्षेत्रों में प्रबंधन की अतिरिक्त आवश्यकता है। भविष्य में इसी जानकारी के आधार पर चीतों की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों के संबंध में बेहतर तैयारी की जा सकेगी।
कूनो में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी व्यापक हो रही है। ऐसे में लैंडस्केप स्तर पर निगरानी और प्रबंधन की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एनटीसीए और विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के साथ वन अधिकारियों को संभावित नई परिस्थितियों के लिए तैयार किया जा रहा है।
फिलहाल ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार करने की प्रक्रिया में वन क्षेत्रों का अध्ययन, सैंपल जोन के माध्यम से डेटा संग्रह और वन अमले का प्रशिक्षण प्रमुख हिस्से हैं। इसका अंतिम उद्देश्य ऐसे वन परिदृश्य को चिन्हित करना और उसके प्रबंधन की तैयारी करना है, जहां कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षित निगरानी की जा सके। इससे चीता संरक्षण को कूनो की सीमाओं से आगे पूरे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के व्यापक वन परिदृश्य से जोड़ने में मदद मिलेगी।





