सोने-चांदी के आयात पर GST छूट खत्म होगी? ज्वेलरी की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर, अब GST काउंसिल लेगी फैसला

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नई दिल्ली। भारत में सोने और चांदी की कीमतों को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों तथा कुछ अधिसूचित एजेंसियों को मिलने वाली 3 प्रतिशत IGST छूट को खत्म करने का प्रस्ताव सामने आया है। जीएसटी की फिटमेंट कमेटी ने इस छूट को हटाकर सभी आयातकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला GST Council को लेना है। अगर काउंसिल प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो बैंकों के जरिए होने वाले कीमती धातुओं के आयात की लागत पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है।

अभी क्या है सोने-चांदी के आयात का नियम?

फिलहाल सोना, चांदी और प्लैटिनम के सामान्य आयात पर 3 प्रतिशत IGST लगाया जाता है। हालांकि बैंकों और सरकार द्वारा अधिसूचित कुछ एजेंसियों को इस कर से छूट प्राप्त है। यह व्यवस्था कुछ विशेष आयातकों को अपेक्षाकृत कम लागत पर बुलियन आयात करने की सुविधा देती है।

अब फिटमेंट कमेटी ने इस व्यवस्था को बदलने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के अनुसार बैंकों और अन्य पात्र आयातकों को मिलने वाली IGST छूट समाप्त की जा सकती है और सोना, चांदी तथा प्लैटिनम के आयात पर एक समान IGST व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि यह अभी अंतिम फैसला नहीं है। इस प्रस्ताव पर GST Council की मंजूरी जरूरी होगी।

इसलिए फिलहाल इसे सोने-चांदी पर लागू होने वाला नया टैक्स नियम नहीं माना जा सकता। जब तक जीएसटी काउंसिल इस पर फैसला नहीं करती, मौजूदा व्यवस्था ही लागू रहेगी।

विदेशी मुद्रा पर भी है सरकार की नजर

सोने और चांदी के आयात का असर केवल ज्वेलरी बाजार तक सीमित नहीं रहता। भारत बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं का आयात करता है और इसके लिए विदेशी मुद्रा का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में जब सोने-चांदी का आयात काफी बढ़ता है, तो देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

इसी वजह से सरकार की नीतियों में सोने के गैर-जरूरी या अत्यधिक आयात को नियंत्रित करना एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। आयात लागत और कर व्यवस्था में बदलाव के जरिए मांग और आयात व्यवहार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि किसी नीति का वास्तविक प्रभाव बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में इसकी मांग मजबूत बनी रहती है। शादी-ब्याह, त्योहारों और पारंपरिक बचत के अलावा निवेश के लिहाज से भी भारतीय बाजार में सोने की महत्वपूर्ण भूमिका है। यही कारण है कि आयात नीति में होने वाला कोई भी बदलाव ज्वेलरी उद्योग, बुलियन कारोबार और ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

आने वाले समय में GST Council का फैसला इस मुद्दे की दिशा तय करेगा। यदि छूट हटती है तो इसका तत्काल प्रभाव मुख्य रूप से आयात लागत और बुलियन कारोबार पर देखने को मिल सकता है। इसके बाद बाजार यह तय करेगा कि बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा आगे की कीमतों में दिखाई देता है। फिलहाल ग्राहकों और ज्वेलरी कारोबारियों की नजर GST Council के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है।

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