ग्वालियर में जाली दस्तावेजों से बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क का राजफाश, बोधगया से जुड़ा कनेक्शन

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में जाली दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने के मामले ने पुलिस जांच में एक ऐसे नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जिसके तार बिहार के बोधगया, असम, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में बांग्लादेशी नागरिकों के भारत आने के बाद उनके लिए पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने तथा उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अलग-अलग बौद्ध मठों में संपर्क और ठहरने की व्यवस्था का इस्तेमाल किया और बाद में आधार कार्ड में पते अपडेट करवाए।

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का सरगना रियाल चौधरी बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि रियाल चौधरी असम के रास्ते भारत आया था। भारत पहुंचने के बाद वह बिहार के बोधगया गया और वहां एक बौद्ध मठ में रुका। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान उसका संपर्क बौद्ध मठों से जुड़े लोगों के नेटवर्क से हुआ। जांच में ढाका स्थित बांग्लादेश के एक बौद्ध मठ का कनेक्शन भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि बोधगया में संपर्क स्थापित होने के बाद रियाल चौधरी को ढाका स्थित बौद्ध मठ से जुड़े संपर्कों तक पहुंच मिली। इसके बाद उसके भारत में आगे के ठिकानों और संपर्कों का सिलसिला बढ़ा।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों के लिए अलग-अलग पहचान दस्तावेज तैयार कराने की कोशिश की गई। इसके बाद इन दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया अपनाई गई। मामला सामने आने के बाद जांच अधिकारी अब दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला को खंगाल रहे हैं। इसमें यह देखा जा रहा है कि आधार कार्ड में पते बदलने से लेकर पासपोर्ट आवेदन और उसके सत्यापन तक कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और उनकी जांच किस प्रकार हुई।

फिलहाल ग्वालियर में सामने आए इस मामले ने विदेशी नागरिकों के लिए फर्जी पहचान दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार कराने की कोशिश से जुड़े नेटवर्क की ओर ध्यान खींचा है। पुलिस बोधगया, बैतूल के आमला, असम, बंगाल और बांग्लादेश के ढाका से जुड़े संपर्कों की जानकारी को एक साथ रखकर जांच आगे बढ़ा रही है। आने वाले समय में पूछताछ और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा इसकी पूरी कार्यप्रणाली के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

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