नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, कार्डियक अरेस्ट के बाद 45 मिनट तक चला CPR

0
13

मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। अभिनेता ने 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्हें तड़के गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार CPR दिया गया, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने उनके निधन की जानकारी दी।

45 मिनट तक चला CPR, MLC दर्ज

नाना पाटेकर के निधन से जुड़े मामले में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है। अधिकारियों और अस्पताल की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब पोस्टमार्टम किया जाएगा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद मृत्यु से संबंधित चिकित्सकीय और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। यही वजह है कि फिलहाल मृत्यु से जुड़ी अंतिम चिकित्सकीय जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

मेडिको-लीगल मामले में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया मृत्यु से संबंधित परिस्थितियों और चिकित्सकीय कारणों के दस्तावेजीकरण का हिस्सा होती है। भारतीय चिकित्सा प्रमाणन व्यवस्था में मृत्यु के कारण का प्रमाणन उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी और, जहां लागू हो, पोस्टमार्टम जैसे साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

बेटे मल्हार पाटेकर ने की निधन की पुष्टि

अभिनेता के बेटे मल्हार पाटेकर ने भी उनके निधन की पुष्टि की है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मल्हार ने बताया कि वह उस समय पुणे में थे और गोवा के लिए रवाना हो रहे थे। उन्होंने कहा कि वह बाद में विस्तृत बयान जारी करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि नाना पाटेकर का निधन प्राकृतिक कारणों से हुआ।

परिवार की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान और अंतिम संस्कार से जुड़ी जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में अभिनेता के अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम को लेकर सामने आने वाली आधिकारिक सूचना के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

हिंदी और मराठी सिनेमा में बनाई अलग पहचान

नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने मुख्यधारा की फिल्मों के साथ-साथ गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी फिल्मों में भी उल्लेखनीय काम किया। उनकी अभिनय शैली में संवादों की प्रभावशाली प्रस्तुति, चेहरे के भाव और किरदार के अनुरूप आवाज का इस्तेमाल प्रमुख विशेषताओं में गिना जाता था।

उनके करियर में कई ऐसी फिल्में रहीं जिनमें उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उनकी फिल्मों में सामाजिक विषयों से लेकर अपराध, पारिवारिक संबंधों और मानवीय भावनाओं से जुड़े किरदार तक शामिल रहे। इसी विविधता ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की श्रेणी में स्थापित किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here