इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में पैक्ड घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में गंभीर मामला सामने आया है। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच लिए गए घी के नमूनों की जांच में कई सैंपल निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। विभाग की जांच में कुल 96 घी के नमूनों में से 28 सैंपल फेल पाए गए। इनमें 24 को असुरक्षित और चार को अवमानक श्रेणी में रखा गया है। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि असुरक्षित पाए गए नमूनों में से जिन 16 नमूनों की सीसा यानी लेड के लिए जांच की गई, उनमें 10 में इसकी मात्रा निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाई गई।
10 नमूनों में तय सीमा से कई गुना ज्यादा सीसा
खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिन 10 नमूनों में सीसा निर्धारित सीमा से अधिक मिला, उनमें इसकी मात्रा 0.10 से 0.21 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक दर्ज की गई। वहीं स्वीकार्य सीमा 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम बताई गई है। इस हिसाब से कुछ नमूनों में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा से पांच गुना, जबकि अधिकतम स्तर वाले नमूने में यह करीब 10.5 गुना तक अधिक रही।
सीसा एक ऐसा धातु तत्व है जिसकी अत्यधिक मात्रा खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचना स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय माना जाता है। इसलिए खाद्य पदार्थों में निर्धारित सुरक्षा सीमा का पालन महत्वपूर्ण होता है। इंदौर में सामने आए इन नमूनों के मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री को रोकना और उपभोक्ताओं तक असुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचने की संभावना को कम करना है।
इंदौर के कई इलाकों में मिला सप्लाई नेटवर्क
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का संबंध इंदौर के कई क्षेत्रों में स्थित डिपो और विक्रेताओं से सामने आया है। जांच के दौरान लसूड़िया, देवास नाका, बांगड़दा, सियागंज, पालदा, लोहामंडी, मल्हारगंज और राजेंद्र नगर सहित अलग-अलग इलाकों से जुड़े स्टॉक और विक्रय नेटवर्क की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित कंपनियों में बड़ी संख्या गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ी बताई गई हैं।
इससे पहले भी इंदौर में खाद्य सुरक्षा विभाग पैक्ड और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर लगातार जांच करता रहा है। जुलाई में एक कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संदिग्ध मिलावट वाले करीब 2,165 किलोग्राम घी को जब्त किया था और अलग-अलग प्रतिष्ठानों से 31 खाद्य नमूने लिए थे। अगस्त में भी एक प्रतिष्ठान से गुजरात निर्मित विभिन्न ब्रांडों का करीब 1,750 लीटर घी जब्त कर 18 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे।
सीसा घी में कैसे पहुंच सकता है?
घी में सीसा मिलने के कई संभावित स्रोत हो सकते हैं, लेकिन किसी खास उत्पाद में सीसा किस कारण से आया, यह संबंधित जांच और वैज्ञानिक विश्लेषण से ही स्पष्ट किया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार नकली या मिलावटी घी को वास्तविक उत्पाद जैसा दिखाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ रंग, रसायन अथवा तेल और वसा में मौजूद अशुद्धियां संभावित स्रोत हो सकती हैं। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री या स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होने वाले कंटेनर से भी संदूषण की संभावना की जांच की जा सकती है।
इसलिए किसी एक कारण को सभी नमूनों पर लागू करना उचित नहीं होगा। प्रत्येक नमूने में सीसे की मौजूदगी और उसकी मात्रा के आधार पर नियामक एजेंसियां आगे की कार्रवाई करती हैं। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच में प्रयोगशाला रिपोर्ट इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है।
इंदौर में सामने आया यह मामला खाद्य पदार्थों की नियमित जांच और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है। खासकर घी जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता स्वाभाविक है। हालांकि, किसी पूरे ब्रांड या सभी पैक्ड घी को संदिग्ध मानना उचित नहीं है। जांच में जिन विशिष्ट नमूनों और स्टॉक को असुरक्षित या अवमानक पाया गया है, कार्रवाई उन्हीं से संबंधित है।
जुलाई से सितंबर के दौरान हुई यह जांच बताती है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने नमूनों की जांच के साथ-साथ बाजार में मौजूद स्टॉक की निगरानी पर भी ध्यान दिया है। अब प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर संबंधित उत्पादों और कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। उपभोक्ताओं के स्तर पर भी जागरूकता, भरोसेमंद स्रोत से खरीदारी और पैकेज पर दी गई जानकारी की जांच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।





