नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के दौरान अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में मामूली कमजोरी के बाद बाजार का रुख तेजी से बदल गया और देखते ही देखते प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट में चले गए। BSE Sensex करीब 1,000 अंक तक टूट गया, जबकि NSE Nifty में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। इस अचानक आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और बाजार में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा आया उछाल माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए महंगा कच्चा तेल इसलिए भी चिंता का विषय होता है क्योंकि इससे परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने की संभावना रहती है। एयरलाइंस, ऑटोमोबाइल, केमिकल, पेंट और अन्य ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। वहीं, यदि महंगे तेल के कारण महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की चिंताएं बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि गुरुवार के कारोबार में क्रूड की कीमतों में तेजी को बाजार की कमजोर धारणा से जोड़कर देखा गया।
RBI के Repo Rate फैसले का असर
बाजार में गिरावट का दूसरा महत्वपूर्ण कारण RBI की Repo Rate से जुड़ा फैसला और उसके बाद लोन महंगा होने की खबरें रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई बैंकों ने अपनी उधारी दरों में बदलाव किया है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और इंडियन बैंक समेत कुछ बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव की खबरों ने बैंकिंग और कर्ज से जुड़े शेयरों पर निवेशकों का ध्यान खींचा।
Repo Rate का सीधा संबंध बैंकों की फंडिंग लागत और कर्ज की दरों से होता है। ब्याज दरों में बदलाव का असर होम लोन, पर्सनल लोन और कारोबार से जुड़े कर्ज की लागत पर पड़ सकता है। बाजार निवेशक ब्याज दरों के माहौल को कंपनियों की भविष्य की कमाई और उपभोक्ता मांग के नजरिए से भी देखते हैं। ऐसे में दरों से जुड़ी अनिश्चितता बाजार में सावधानी बढ़ा सकती है।
कुल मिलाकर गुरुवार की बाजार गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, RBI की ब्याज दर से जुड़ी स्थिति, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों के साथ Gift Nifty में गिरावट जैसे कारकों को प्रमुखता से देखा जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में अचानक आई कमजोरी ने एक बार फिर यह दिखाया कि घरेलू शेयर बाजार अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी पूंजी के प्रवाह जैसे कारकों से कितनी तेजी से प्रभावित हो सकता है। निवेशकों के लिए ऐसे उतार-चढ़ाव के दौर में बाजार की दिशा तय करने वाले आर्थिक संकेतकों और कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।




