नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2026 में नवरात्र की तैयारियों के बीच घटस्थापना, पूजा के शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और माता के आगमन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना और 20 अक्टूबर को व्रत पारण का उल्लेख किया गया है। इस बार मां दुर्गा के हाथी पर सवार होकर आने की मान्यता भी चर्चा में है। धार्मिक परंपरा में देवी के वाहन को नवरात्र के आरंभ और समापन के दिन से जोड़कर देखा जाता है।

घटस्थापना कब होगी और क्या हैं शुभ मुहूर्त?
दी गई जानकारी में 11 अक्टूबर को घटस्थापना की तारीख बताई गई है। इसके साथ अमृत बेला सुबह 9:31 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक बताया गया है।
धार्मिक अनुष्ठानों में घटस्थापना को नवरात्र की शुरुआत का प्रमुख संस्कार माना जाता है। इस दौरान कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश को समृद्धि, शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु पूजा स्थल की सफाई करके विधिपूर्वक कलश स्थापना करते हैं और इसके बाद नौ दिनों तक नियमित पूजा-अर्चना का संकल्प लेते हैं।
महत्वपूर्ण: दिए गए समय को अंतिम और सार्वभौमिक मुहूर्त मानने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से पुष्टि कर लें। घटस्थापना का शुभ समय स्थान, सूर्योदय और पंचांग की गणना के अनुसार अलग हो सकता है। विशेष रूप से 2026 की तिथि और मुहूर्त के संबंध में प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक पंचांग से मिलान करना उचित होगा।
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, क्या है मान्यता?
नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर विभिन्न धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। देवी पुराण से जुड़ी परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया जाता है कि सप्ताह के जिस दिन नवरात्र शुरू होता है, उसके आधार पर माता के वाहन का निर्धारण किया जाता है।
प्रचलित मान्यता के अनुसार, रविवार या सोमवार को नवरात्र आरंभ होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। हाथी को धार्मिक प्रतीकों में ऐश्वर्य, शक्ति, स्थिरता और समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसी वजह से हाथी पर माता के आगमन को कई श्रद्धालु शुभ संकेत के रूप में देखते हैं।
हालांकि, यह धार्मिक विश्वास और परंपरागत व्याख्या का विषय है। इसे भविष्य में होने वाली घटनाओं का प्रमाणित संकेत नहीं माना जाना चाहिए। माता के वाहन से संबंधित मान्यताओं का महत्व श्रद्धालुओं की आस्था और क्षेत्रीय परंपराओं के संदर्भ में समझा जाता है।
नवरात्र व्रत का समापन कब होगा?
दी गई जानकारी में 20 अक्टूबर, मंगलवार को सुबह 9:35 बजे के बाद व्रत पारण का समय बताया गया है। पारण का अर्थ व्रत पूरा होने के बाद नियमानुसार भोजन ग्रहण करना है। कुछ परिवार अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, जबकि अन्य परंपराओं में दशमी के दिन विशेष पूजा के बाद व्रत का समापन किया जाता है।
व्रत पारण की तिथि और समय तिथि-क्षय, स्थानीय पंचांग और पूजा की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग से पुष्टि करनी चाहिए।
नवरात्र में श्रद्धा और नियमों का महत्व
शारदीय नवरात्र केवल पूजा और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि संयम, साधना और आत्मानुशासन से जुड़ा अवसर भी है। इन दिनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और घरों में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हैं।
घटस्थापना से लेकर अंतिम दिन की पूजा तक स्वच्छता, नियमित उपासना और अपनी पारिवारिक परंपराओं का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत रखने वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए उपवास करना चाहिए।
इस प्रकार, नवरात्र की तैयारी में घटस्थापना की सही तिथि, स्थानीय शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और व्रत पारण के समय की पुष्टि सबसे जरूरी है। मां दुर्गा के हाथी पर आगमन से जुड़ी मान्यता श्रद्धालुओं की आस्था का हिस्सा है, जबकि तारीखों और मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए प्रमाणित पंचांग का सहारा लेना चाहिए। इससे श्रद्धालु अपनी पूजा की तैयारियां व्यवस्थित ढंग से कर सकेंगे और धार्मिक परंपराओं का पालन सही जानकारी के साथ कर पाएंगे।




