सीहोर के कोसमी में आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई से भड़के शिवराज सिंह चौहान, अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे

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सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय बन गया है। वन विभाग और वन विकास निगम की कार्रवाई से नाराज केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को गांव पहुंचे। प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई और ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव से भी फोन पर बात की। इस घटना ने प्रदेश सरकार के सामने वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया, आदिवासी परिवारों की आजीविका और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोसमी गांव में क्या हुआ?

मामला सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव का है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, यहां वन विकास निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई के दौरान बरेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े गए। कार्रवाई के दौरान खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसल को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, एक कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। <Cite refs={[“turn948896search0″,”turn948896search5”]}/>

घर और फसल प्रभावित होने से संबंधित परिवारों के सामने रहने की जगह और आजीविका को लेकर चिंता पैदा हो गई। ग्रामीणों के लिए मकान केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा और स्थिरता का आधार भी होते हैं। इसी तरह खेतों में खड़ी फसल नष्ट होने से उनकी मेहनत और संभावित कृषि आय पर असर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, कोसमी में हुई कार्रवाई ने मध्य प्रदेश सरकार के सामने एक संवेदनशील चुनौती पेश की है। वन भूमि से जुड़े नियमों का पालन और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का न्यायसंगत समाधान—दोनों महत्वपूर्ण हैं। मामले की निष्पक्ष जांच, तथ्यों की पारदर्शी जानकारी और नियमानुसार राहत से ही विवाद के समाधान की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

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