सीहोर के बुधनी वन क्षेत्र में अतिक्रमण पर जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी, आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने के मामले में सामने आए ये तथ्य

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सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार चर्चा में है। इस प्रकरण में जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को भेजी गई रिपोर्ट में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण, सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाने और प्रभावित परिवारों के आवास से जुड़े कई तथ्य सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वन भूमि पर कब्जा करने वाले कुछ लोग दूसरे जिलों से आए थे और उन्होंने सागौन के पौधे काटकर वहां अस्थायी झोपड़ियां बना ली थीं। हालांकि, इस मामले में वन भूमि के संरक्षण और प्रभावित परिवारों के आवास से जुड़े पहलुओं को लेकर विवाद बना हुआ है।

31.48 हेक्टेयर वन भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

जांच रिपोर्ट के अनुसार, भैरूंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट नंबर 426 में वन विकास निगम की 31.48 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह जमीन वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल के अधीन थी।

जानकारी देते चले कि, भूमि के हस्तांतरण का विवरण भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है। वर्ष 2020 में सामान्य वनमंडल से 186.960 हेक्टेयर वन भूमि वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। इसके बाद निगम ने वर्ष 2021 में इस क्षेत्र के 135 हेक्टेयर हिस्से में सागौन के पौधे लगाने का काम किया।

आखिर में बता दें कि, जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के आधार पर संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट है कि प्रशासन ने वन भूमि के हस्तांतरण, सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से संबंधित विवरण शासन के सामने रखा है।

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